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नौणी विश्वविद्यालय में मनाया ओज़ोन दिवस…

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ozone day 2025
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने 16 सितम्बर 2025 को विश्व ओज़ोन दिवस  के अवसर पर वैश्विक समुदाय के साथ कदम मिलाते हुए इस दिवस का आयोजन किया।

हिमाचल समय, सोलन, 16 सितम्बर ।

डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने 16 सितम्बर 2025 को विश्व ओज़ोन दिवस  के अवसर पर वैश्विक समुदाय के साथ कदम मिलाते हुए इस दिवस का आयोजन किया।

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 यह दिवस मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की वर्षगांठ को चिह्नित करता है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, एक ऐतिहासिक 1987 की संधि है जिसका उद्देश्य ओज़ोन परत को क्षति पहुँचाने वाले पदार्थों को चरणबद्ध रूप से समाप्त करना है।

इस वर्ष का वैश्विक विषय विज्ञान से वैश्विक कार्यवाही तक  रहा कार्यक्रम में 80 से  अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक  भाग लिया,  जिनमें शोधार्थी, वैज्ञानिक, स्पेस क्लब के सदस्य और इग्नू पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम के विद्यार्थी शामिल थे।

इस अवसर पर विशेषज्ञ व्याख्यान, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, नारा लेखन, पोस्टर निर्माण तथा कैंपस में जागरूकता रैली जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।

पर्यावरण विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. सतीश भारद्वाज ने ओज़ोन क्षय की समझ में वैज्ञानिक शोध की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

 उन्होंने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत वैश्विक सहयोग को ओज़ोन-नाशक पदार्थों में उल्लेखनीय कमी का श्रेय देते हुए छात्रों, वैज्ञानिकों और नागरिकों से आग्रह किया कि वे सतत, ओज़ोन और 

जलवायु अनुकूल तकनीकों को अपनाते हुए वैज्ञानिक प्रमाणों पर कार्यवाही करते रहें। उन्होंने कहा कि आज ओज़ोन परत ठीक हो रही है क्योंकि दुनिया ने विज्ञान जगत की बात सुनी और मिलकर कदम उठाए।

 यह हमें अन्य वैश्विक पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिए भी प्रेरित करना है।  उन्होंने यह भी बताया कि यदि वर्तमान नीतियाँ जारी रहती हैं, तो इस सदी के मध्य तक ओज़ोन परत पूरी तरह से पुनः स्वस्थ

 हो जाएगी। डॉक्टोरल शोधार्थी पंसुल ने बताया कि समताप मंडल में स्थित ओज़ोन परत पृथ्वी को हानिकारक यूवी-बीवि किरणों  से बचाने वाली ढाल का कार्य करती है। उन्होंने बताया कि मानव-

निर्मित रसायन जैसे सीएफसी  इसके क्षय का कारण बने हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु स्थिरता को गंभीर खतरे उत्पन्न हुए हैं। कार्यक्रम संयोजक

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डॉ. हुकम चंद शर्मा ने प्रतिभागियों को ओज़ोन क्षय और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर पहल करने हेतु प्रेरित किया।

डॉ. प्रतिमा और डॉ. विपिन शर्मा ने भी ओज़ोन संरक्षण पर चर्चा को आगे बढ़ाते हुए युवाओं को सामूहिक प्रयासों के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. पी.के. बवेजा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

 इसके पश्चात डॉ. एम.एस. जांगड़ा और डॉ. कार्तिकेय साहिल के नेतृत्व में कैंपस में जागरूकता रैली निकाली गई। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।

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पोस्टर प्रतियोगिता में ईप्सा (प्रथम), रूप नंदिनी (द्वितीय) और तनिषा (तृतीय) रहीं। नारा लेखन प्रतियोगिता में आँचल सोनी (प्रथम), अनुष्का (द्वितीय) और जौतलपुई (तृतीय) रही। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता स्ट्रैटोस्क्वाड  टीम ने जीती, जिसका नेतृत्व डॉक्टोरल शोधार्थी तन्वी  ने किया।

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