भावना ठाकुर,
17 अगस्त / अर्की (सोलन)।
सोलन जिला के घणागुघाट पंचायत के शेरपुर में सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे एक बड़ी घटना सामने आई, जब बुघार-दाड़ला से अर्की जा रही एचआरटीसी सोलन डिपो की नई इलेक्ट्रिक बस सड़क पर फंस गई। बस के कैंची मोड़ पर फंसने से आवाजाही ठप हो गई और स्थानीय ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शेरपुर की कैंची (तीखे मोड़) को काटते समय बस की बॉडी नीचे से सड़क से टच हो गई, जिसके बाद बस न तो आगे बढ़ पाई और न ही पीछे हो सकी। बस के काफी देर तक सड़क पर फंसे रहने से मार्ग पर वाहनों की कतारें लग गईं । मौके पर पहुंचे घणागुघाट के उपप्रधान हरीश कुमार ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “ग्रामीण रूट पर नई इलेक्ट्रिक बस चलाने से पहले सड़क की स्थिति और बस की तकनीकी क्षमता के बीच अनुकूलता का मौके पर निरीक्षण करना अत्यंत जरूरी है।” हरीश कुमार ने बताया कि शेरपुर सहित आसपास के कई गांवों के स्कूली बच्चे और कामकाजी लोग पिछले करीब एक सप्ताह से परिवहन संबंधी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की सड़कों पर तीखे मोड़, ऊबड़-खाबड़ हिस्से और कम चौड़ाई जैसी समस्याएं हैं, इसलिए बस सेवा शुरू करने से पहले पूरे रूट का तकनीकी एवं सड़क स्तर पर निरीक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने विभाग से मांग की कि बस की तकनीकी बनावट और ग्राउंड क्लीयरेंस को देखते हुए ही मार्ग पर बस संचालन की अनुमति दी जाए। साथ ही, यदि सड़क में सुधार की आवश्यकता है तो उसे भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। बस के फंसने के बाद स्थानीय लोगों ने समाजसेवक एवं सरकारी ठेकेदार अतुल शर्मा से मदद मांगी। ग्रामीणों के अनुसार, अतुल शर्मा ने करीब 10 किलोमीटर दूर से अपना काम रोककर तुरंत जेसीबी और मजदूर मौके पर भेजे। जेसीबी और मजदूरों की मदद से बस के फंसे हिस्से के नीचे सड़क की आवश्यक खुदाई कर उसे समतल किया गया। इसके बाद बस को आसानी से बाहर निकालकर उसके गंतव्य अर्की की ओर रवाना कर दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने इस मुश्किल घड़ी में त्वरित मदद के लिए अतुल शर्मा का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनकी सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। इस पूरे मामले पर एचआरटीसी अर्की के अड्डा इंचार्ज राजेंद्र ने बताया कि “इस रूट पर इससे पहले भी दो बार बस का सफल संचालन हो चुका है। इस बार चालक नया होने और कैंची मोड़ पर सड़क का हिस्सा समतल न होने के कारण बस थोड़ी फंस गई थी, जिसे बाद में निकाल दिया गया।” हालांकि, ग्रामीण इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने मांग की कि बरसात के मौसम में पूरे रूट का गहन निरीक्षण किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो और आम जनता को असुविधा न झेलनी पड़े।








