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10 साल बाद चम्बा शहरी निकाय और 15 साल बाद चुवाड़ी शहरी निकाय में कांग्रेस के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने गएः जगत सिंह नेगी

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-पेट्रोल, डीजल, गैस की महंगाई से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा फैला रही भ्रम

भूपेंद्र ठाकुर,

04 जून / शिमला।

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राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज यहां एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि 10 साल बाद चम्बा और 15 साल बाद चुवाड़ी शहरी निकायों में कांग्रेस का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने कहा कि दस साल के बाद चम्बा शहरी निकाय और 15 साल बाद चुवाड़ी नगर निकाय में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पदों पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने कब्जा किया है।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस जैसी ज्वलंत समस्याओं से प्रदेश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा नेता पंचायत चुनावों में जीत का झूठा श्रेय लेकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। आज यहां एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि आज प्रदेश की जनता महंगाई के मुद्दे पर भाजपा से जवाब मांग रही है। देश में पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडरों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आम लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा देशवासियों से सोना-चांदी जैसी खरीदारी से परहेज करने और त्याग की अपील की जा रही है, लेकिन बढ़ती महंगाई और आवश्यक वस्तुओं के दामों पर भाजपा कोई चर्चा नहीं करती।


उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेश के लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने के लिए पंचायती राज चुनावों के परिणामों को अपने पक्ष में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही है, जबकि प्रदेश भर में लोगों ने भाजपा को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव किसी भी राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़े गए थे। इसके बावजूद प्रदेश की 3,754 पंचायतों में से लगभग 2,400 प्रधान और 2,600 उपप्रधान कांग्रेस विचारधारा से जुड़े उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं। उन्होंने कहा कि शहरी निकायों के चुनाव परिणाम भी कांग्रेस के पक्ष में रहे हैं। प्रदेश की 53 शहरी स्थानीय निकायों में से 29 पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार विजयी रहे हैं। विशेष रूप से कांगड़ा जिले के छः नगर निकायों में कांग्रेस ने जीत हासिल की है, जबकि भाजपा का वहां पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया। मंडी जिला में भी भाजपा का सफाया हुआ है। ऐसे में भाजपा किस आधार पर अपनी जीत का दावा कर रही है, यह समझ से परे है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव किसी राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़े जाते और इनमें उम्मीदवारों की व्यक्तिगत लोकप्रियता, स्थानीय मुद्दे तथा क्षेत्रीय समीकरण अधिक प्रभावी रहते हैं। इसके बावजूद भाजपा चुनाव परिणामों को राजनीतिक रंग देकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।

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