Home कल्चर डॉ जोगिन्दर हाब्बी को मिलेगा संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार

डॉ जोगिन्दर हाब्बी को मिलेगा संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार

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– राष्ट्रपति करेंगे डॉ जोगिन्दर हाब्बी को अलंकृत

– संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार के लिए डॉ जोगिन्दर हाब्बी चयनित

हिमाचल समय न्यूज़,

11 जून / सिरमौर।

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अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त लोक कलाकार एवं वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. जोगिन्दर हाब्बी का चयन देश के सर्वोच्च सांस्कृतिक सम्मानों में से एक संगीत नाटक अकादेमी पुरस्कार 2025 के लिए किया गया है। लोक नृत्य एवं लोक संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में इनके उल्लेखनीय योगदान के लिए यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान महामहिम राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाएगा।


डॉ. हाब्बी पिछले तीन दशकों से अधिक समय से हिमाचल प्रदेश की विलुप्तप्राय लोक विधाओं के संरक्षण हेतु समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। अपने सांस्कृतिक गुरु पद्मश्री विद्यानंद सरैक के साथ उन्होंने ठोडा, हाटी की नाटी, सिंहटू नृत्य, बढाल्टू नृत्य तथा डग्याली नाच जैसी लोक विधाओं पर गहन शोध एवं अध्ययन किया। इन विलुप्त लोक कलाओं को मंचीय स्वरूप प्रदान कर इन्हें पुनः जनमानस तक पहुंचाया जिसके परिणामस्वरूप आधुनिकता की दौड़ में अपनी पहचान खो रही कई लोक विधाओं को नया जीवन और व्यापक लोकप्रियता प्राप्त हुई।
डॉ. हाब्बी ने चूड़ेश्वर सांस्कृतिक मंडल एवं आसरा संस्था की स्थापना कर इन सांस्कृतिक दलों के कलाकारों को प्रशिक्षण प्रदान कर तैयार की गई नृत्य विधाओं की भारत के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों में प्रस्तुतियां करवाई। इसके अतिरिक्त उन्होंने अपने निजी संसाधनों से हाब्बी मानसिंह कला केन्द्र की स्थापना की जहां लोक नृत्य, लोकनाट्य तथा अन्य पारंपरिक कलाओं का नियमित प्रशिक्षण एवं मंचन किया जाता है।
डॉ. हाब्बी के नेतृत्व में सिरमौर तथा हिमाचल की लोक नृत्य परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। इनके नेतृत्व ओर निर्देशन में कलाकारों ने बुल्गारिया, मैसेडोनिया, ग्रीस और तुर्की सहित विभिन्न देशों में अनेक सफल प्रस्तुतियां दीं। विशेष रूप से ठोडा जैसी विशिष्ट लोक विधा को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने का श्रेय भी इन्हें प्राप्त है।
लोक संस्कृति के क्षेत्र में डॉ. हाब्बी के कार्यों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर भी मान्यता मिली है। इनके नेतृत्व में इण्डिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अनेक उपलब्धियां दर्ज हुई हैं। इन्होंने लोक संस्कृति से संबंधित कई शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं, दो पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं तथा तीन पुस्तकें प्रकाशनाधीन हैं। इसके अतिरिक्त वे लोक कलाओं पर आधारित पांच डॉक्युमेंट्री तथा ठोडा विषय पर एक टेलीफिल्म का निर्देशन भी कर चुके हैं तथा कई बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में लोकनृत्यों की कोरियोग्राफी कर चुके हैं।


इस उपलब्धि पर डॉ. जोगिन्दर हाब्बी ने अपने आध्यात्मिक गुरु सतगुरु मधु परमहंस साहिब जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक कलाओं और उन्हें संरक्षित करने में जुटे सभी लोक कलाकारों का सम्मान है।
डॉ हाब्बी ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने सांस्कृतिक गुरु पद्मश्री विद्यानंद सरैक, अपने सांस्कृतिक दल के कलाकारों तथा लोक संस्कृति के संरक्षण में लगे सभी कला प्रेमियों को दिया। इन्होंने संगीत नाटक अकादेमी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अकादेमी ने इस सम्मान के माध्यम से हिमाचल प्रदेश की लोक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष प्रतिष्ठा प्रदान की है।
इससे पूर्व हिमाचल प्रदेश से स्वर्गीय हेतराम तनवार, पद्मश्री विद्यानंद सरैक, पंडित सोमदत्त बट्टू तथा पंडित डॉ. के. एल. सहगल जैसी प्रतिष्ठित विभूतियां भी इस सम्मान से अलंकृत हो चुकी हैं।

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