Home राजनीतिक “अपनी नाकामियों का ठीकरा केंद्र पर फोड़ना बंद करें सुक्खू, झूठी गारंटियां...

“अपनी नाकामियों का ठीकरा केंद्र पर फोड़ना बंद करें सुक्खू, झूठी गारंटियां पूरी करना केंद्र का काम नहीं: जयराम ठाकुर”

52
0
BJP Himachal Pradesh
पंचायत चुनाव न करवा कर ग्रामीण और शहरी निकायों का बहुत नुकसान कर रहे हैं मुख्यमंत्री

हिमाचल समय, शिमला, 02 फरवरी ।

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि अपनी नाकामियों का ठीकरा केंद्र पर फोड़ने की कोशिश करने के बजाय उन्हें राज्य की वित्तीय स्थिति पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि चुनावी समय में दी गई झूठी गारंटियों को पूरा करना केंद्र का दायित्व नहीं है।

Jeevan Ayurveda Clinic

शूलिनी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. पी.के. खोसला को समृद्धि 2025 में ‘स्थायी शिक्षा उद्यमी’ के रूप में सम्मानित किया गया

bhushan ad

जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार 2047 के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को आधार बनाकर पूरे देश के लिए समान नीतियां बनाती है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक युगांतकारी परिवर्तन की घोषणा की है,

जिसके तहत ऐतिहासिक मनरेगा (MGNREGA) योजना के स्थान पर अब एक नया व्यापक कानून ‘विबी: जी राम जी’  (विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन – ग्रामीण) लागू किया जा रहा है। सरकार ने इस बदलाव के तहत बजट में भारी फेरबदल करते हुए नई योजना के लिए ₹95,692.31 करोड़ का विशाल आवंटन किया है, जबकि मनरेगा के

लंबित कार्यों को पूर्ण करने के लिए ₹30,000 करोड़ का अतिरिक्त बजट दिया है। जो मुख्य रूप से पुरानी देनदारियों और ट्रांज़िशन अवधि के लिए आरक्षित है। दोनों योजनाओं में का बजट लगभग सवा लाख करोड़ से अधिक है। यह आंकड़ा ऐतिहासिक है जबकि कांग्रेस नेता शोर मचा रहे हैं कि मनरेगा बंद कर दी है।जबकि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट यह

बताती हैं कि प्रदेश के लगभग 1.72 लाख कार्य लंबित हैं और 655 पंचायतों में लोगों को एक दिन का भी काम लोगों को नहीं मिल पाया हैं। राज्य के हिस्से की दिहाड़ी अगस्त से मनरेगा कामगारों को नहीं मिली हैं। 

यह नई योजना केवल मजदूरी देने का माध्यम नहीं बल्कि एक मिशन है, जिसमें ग्रामीण परिवारों को अब 100 के बजाय 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है और मजदूरों के हित में भुगतान की अवधि को 15 दिनों से घटाकर साप्ताहिक (7 दिन) कर दिया गया है। केंद्र अब सामान्य राज्यों से 40 प्रतिशत और हिमाचल जैसे हिमालयी राज्यों से मात्र 10 प्रतिशत हिस्सेदारी

ही लेगा  लेकिन यहां इस देनदारी से पहले ही सुक्खू सरकार के पसीने छूटने शुरू हो गए हैं। केंद्र के द्वारा हिमाचल में लगभग 191 योजनाएं चल रही हैं। जिसमें राज्य सरकार को मात्र दस प्रतिशत हिस्सेदारी देनी हैं, लेकिन राजनैतिक कारणों और कुप्रबंधन के कारण सुक्खू सरकार वह भी समय से नहीं दे रही है। जिसका ख़ामियाजा प्रदेश के लोग उठा रहे हैं।

जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में  ‘विबी: जी राम जी’ योजना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती  है क्योंकि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मनरेगा के तहत कुल 1,71,841 ‘स्पिल ओवर’ कार्य (अधूरे कार्य) चिह्नित किए गए हैं, जो पिछले वर्षों में स्वीकृत तो हुए लेकिन समय पर पूरे नहीं हो सके।

इन लंबित कार्यों में सबसे बड़ी संख्या व्यक्तिगत भूमि विकास (1,46,653) की है, इसके साथ ही ग्रामीण संपर्क (11,110), भूमि विकास (3,336), जल संरक्षण (2,651) और पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार (295) जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी बीच में लटके हैं।

मंडी के इतिहास, सामाजिक व धार्मिक विरासत से रूबरू कराएगी हेरिटेज वॉक

जयराम ठाकुर ने कहा कि नई योजना ‘विबी: जी राम जी’ का मुख्य फोकस अब केवल गड्ढे खोदने जैसे कार्यों के बजाय टिकाऊ बुनियादी ढांचे, जल संचयन और ग्रामीण सड़क निर्माण पर होगा, जिससे हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में बुनियादी ढांचे की मजबूती की उम्मीद तो है,

लेकिन लंबित पड़े लाखों कार्यों का नए मिशन में समायोजन और राज्य की 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी का प्रबंधन सुक्खू सरकार के लिए एक बड़ी प्रशासनिक और वित्तीय चुनौती बनकर बनी हुई है। ये नालायकी उनकी अपनी सरकार की है।

ताज़ा खबरों के लिए जोड़े www.himachalsamay.com

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here