भूपेंद्र ठाकुर,
13 जुलाई / शिमला।
किशाऊ बाँध पर बड़ी जीत के बाद सुक्खू सरकार ने बीबीएमबी एरियर को वापिस लेने के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से हिमाचल प्रदेश के लंबित वित्तीय अधिकारों और बकाया राशि की वसूली के मुद्दे पर केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर से फोन पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार से इस मामले में सक्रिय सहयोग का आग्रह करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश लंबे समय से अपने वैधानिक अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहा है और अब राज्य सरकार इन अधिकारों को हर हाल में सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया कि किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना पर हिमाचल प्रदेश तभी आगे बढ़ेगा, जब हरियाणा सरकार बीबीएमबी से संबंधित अपने हिस्से के बकाया भुगतान के संबंध में स्पष्ट सहमति व्यक्त करेगी तथा सर्वोच्च न्यायालय में इस आशय का शपथ-पत्र दायर करेगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के हितों की अनदेखी कर राज्य से किसी नए परियोजना पर सहयोग की अपेक्षा करना उचित नहीं होगा। बार-बार आग्रह करने के बावजूद पंजाब और हरियाणा ने हिमाचल प्रदेश को उसके अधिकार से वंचित रखा है। मुख्यमंत्री के आग्रह पर केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आश्वासन् दिया कि वह इस विषय पर हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे तथा हिमाचल प्रदेश के वैधानिक अधिकारों के संरक्षण और समाधान के लिए आवश्यक पहल करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 15 वर्ष पूर्व सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेशों में स्पष्ट रूप से हिमाचल प्रदेश को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड की परियोजनाओं एवं उनसे प्राप्त होने वाले लाभों में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार स्वीकार किया है। इसके बावजूद हिमाचल प्रदेश पिछले एक दशक से अधिक समय से अपने हिस्से की 13,066 मिलियन यूनिट बिजली तथा उससे जुड़े वित्तीय लाभों से वंचित है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद अब प्रदेश सरकार बीबीएमबी से अपने हिस्से के लगभग 4,200 करोड़ रुपये के बकाया की वसूली के लिए सभी आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक कदम उठा रही है। यह राशि हिमाचल प्रदेश के लोगों का वैधानिक अधिकार है और राज्य सरकार इसे प्राप्त करने के लिए पूरी दृढ़ता से प्रयासरत है।

422 मेगावाट की किशाऊ बाँध परियोजना पर वर्ष 2023 में पुराने समझौते को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अस्वीकार कर दिया था, जिसके तहत हिमाचल को बिजली उत्पादन की लागत का एक बड़ा हिस्सा वहन करना पड़ता। लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू के कड़े रुख के बाद अब राज्य को बिना एक भी पैसा लगाए सालाना 600 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होगा, जो हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की एक बड़ी जीत है।








