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तीन पीढ़ियों का अनोखा संगम: गुरुकुल स्कूल में भावनाओं से सराबोर हुआ ‘ग्रैंड स्प्रिंट डे’

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Gurukul International School Events
गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल का आज का दिन विद्यालय के इतिहास में सदा स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा। इस अवसर पर अनेक प्रेरणादायी कार्यक्रमों का सफल आयोजन हुआ—कक्षा 5 और 8 के लिए MDP गतिविधि, अभिभावकों हेतु PTM तथा प्री-प्राइमरी विंग का बहुप्रतीक्षित ‘ग्रैंड स्प्रिंट डे’।

हिमाचल समय, सोलन, 30 सितंबर।

गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल का आज का दिन विद्यालय के इतिहास में सदा स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा। इस अवसर पर अनेक प्रेरणादायी कार्यक्रमों का सफल आयोजन हुआ—कक्षा 5 और 8 के लिए MDP गतिविधि, अभिभावकों हेतु PTM तथा प्री-प्राइमरी विंग का बहुप्रतीक्षित ‘ग्रैंड स्प्रिंट डे’।

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इस विशेष दिन का मुख्य आकर्षण ग्रैंड स्प्रिंट डे रहा, जिसमें नन्हें-मुन्नों ने अपने दादा-दादी व नाना-नानी के लिए मनोहारी नृत्य प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया।

जब दादा-दादी ने स्वयं बच्चों के साथ खेलों और दौड़ों में भाग लिया, तो यह क्षण केवल एक प्रतियोगिता नहीं रहा, बल्कि तीन पीढ़ियों के बीच प्रेम, आशीर्वाद और आत्मीयता का जीवंत संगम बन गया।


बच्चों की खिलखिलाती हंसी और दादा-दादी की स्नेहभरी आँखें इस बात का सजीव प्रमाण थीं कि बड़ों का आशीर्वाद और नन्हों की मासूमियत मिलकर रिश्तों की सबसे पवित्र डोर बुनते हैं। यह दृश्य हर किसी के हृदय को गहराई तक छू गया।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. लखविंदर कौर अरोड़ा ने कहा कि आज का दिन हमारे विद्यालय ही नहीं, बल्कि हम सभी के जीवन का अमूल्य उपहार है। विद्यालय की प्रबंधन समिति का मैं हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ,

जिनके मार्गदर्शन और सहयोग से ऐसे सजीव और संस्कारपूर्ण आयोजन संभव हो पाते हैं। हमारे शिक्षकों की मेहनत और रचनात्मकता ने इस अवसर को भव्य और अविस्मरणीय बनाया है।

आज हमारे नन्हें-मुन्नों ने जो प्रस्तुति दी, वह केवल कला का प्रदर्शन नहीं बल्कि उनके हृदय में बसे संस्कार, प्रेम और कृतज्ञता का प्रतीक है। दादा-दादी और पोते-पोतियों के बीच का यह रिश्ता किसी आशीर्वाद से कम नहीं।

आज जब नन्हें हाथों ने बड़ों के हाथ थामे, तो मानो परंपरा, संस्कृति और प्रेम का प्रवाह एक साथ बह उठा। यह आयोजन हमें यह स्मरण कराता है कि परिवार ही जीवन की पहली पाठशाला है और हमारे बड़े-बुजुर्ग उसकी सबसे अनमोल धरोहर हैं।

दादा-दादी के स्नेह के बिना बच्चों का बचपन अधूरा है और बच्चों की मासूम मुस्कान के बिना बुजुर्गों का जीवन। यही दो पीढ़ियों का संगम हमारी संस्कृति की आत्मा और हमारी जड़ों की शक्ति है।”

कार्यक्रम के अंत में अभिभावकों तथा ग्रैंड पैरेंट्स के लिए जलपान की विशेष व्यवस्था भी की गई, जिसने इस दिन को और भी आत्मीय और यादगार बना दिया।
जलपान के पश्चात् सभी अभिभावकों और दादा-दादी ने कक्षा 5 से 8 तक के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत ‘मॉडल मैजिक  मंत्रिका’ (गणित एवं विज्ञान प्रदर्शनी) का

अवलोकन किया। छात्रों ने बड़े आत्मविश्वास के साथ अपने मॉडल्स प्रस्तुत किए और उनकी कार्यप्रणाली को विस्तारपूर्वक समझाया। सभी ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, शिक्षकों के मार्गदर्शन और बच्चों के आत्मविश्वास की सराहना की।

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इस प्रदर्शनी ने यह सिद्ध कर दिया कि गुरुकुल इंटरनेशनल केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि नवाचार, रचनात्मकता और आत्मविश्वास का भी केंद्र है। विद्यालय की प्रधानाचार्या ने विद्यार्थियों की  प्रशंसा करते हुए कहा कि “प्रिय विद्यार्थियों, आज की गणित एवं विज्ञान प्रदर्शनी देखकर मेरा हृदय गर्व से भर गया।

आपने जिस आत्मविश्वास और रचनात्मकता से अपने मॉडल प्रस्तुत किए, वह वास्तव में अद्वितीय है। आपकी मेहनत और जिज्ञासा ही आपको भविष्य में नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी। आप सब पर मुझे बेहद गर्व है।

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