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समानता, समावेशिता और देशभक्ति के आदर्शों को अपनाना ही रामधारी सिंह ‘दिनकर’ को सच्ची श्रद्धांजलि: राज्यपाल

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भूपेंद्र ठाकुर,

07 जून / शिमला।

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राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि ‘रश्मिरथी पर्व’ एक महान कवि को याद करने के साथ-साथ जीवन में समरसता, समानता और देशभक्ति के मूल्यों को आत्मसात करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि उनके आदर्शों को अपनाते हुए एक सशक्त और समावेशी राष्ट्र के निर्माण में योगदान देना ही राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
राज्यपाल ने आज शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की अमर कृति ‘रश्मिरथी’ के गोल्डन जुबली वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।


इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि यह आयोजन भारत की राष्ट्रीय चेतना को आकार देने वाले महान विभूतियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी ने विविध प्रकार से समाज का मार्गदर्शन किया, लेकिन इनका साझा दृष्टिकोण राष्ट्र, समाज और मानवता को सर्वाेपरि रखना था।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं को उठो, जागो और आगे बढ़ो का संदेश दिया। लोकमान्य तिलक ने स्वराज को प्रत्येक भारतीय का जन्मसिद्ध अधिकार बताया। अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीति में संवाद और संवेदनशीलता की मिसाल प्रस्तुत की जबकि दिनकर ने अपनी कविताओं से इन मूल्यों को अमर बना दिया।


‘रश्मिरथी’ के मुख्य पात्र कर्ण का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनका जीवन केवल एक कहानी नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के संघर्षों और आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने युवाओं से कर्ण के धैर्य, साहस और दृढ़ संकल्प से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सच्चा रश्मिरथी वह नहीं जिसके पास सब कुछ है, बल्कि वह है जिसने अपने अंतःकरण के प्रकाश से विपरीत परिस्थितियों के अंधकार को पराजित किया। हम अपने भाग्य के स्वयं सारथी हैं। हम ज्ञान अर्जन, कड़ी मेहनत और नवाचार से सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ हमें अपने मूल्यों, अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए।

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