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नौणी विश्वविद्यालय और महिंद्रा समिट एग्री साइंसेज के बीच शोध एवं प्रशिक्षण के लिए समझौता

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Nauni and Mahindra Summit Agrisciences
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने महिंद्रा समिट एग्री साइंसेज लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है।

हिमाचल समय, सोलन, 19 जुलाई।

डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने महिंद्रा समिट एग्री साइंसेज लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है।

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इस साझेदारी का उद्देश्य बागवानी, वानिकी एवं संबंधित क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान, ज्ञान आदान-प्रदान और अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

महिंद्रा समिट एग्री साइंसेज लिमिटेड एग्रीबिजनेस क्षेत्र की एक अग्रणी कंपनी है, जो फसल सुरक्षा, बीज उत्पादन, सूक्ष्म सिंचाई और कृषि उत्पादों के निर्यात में विशेषज्ञता रखती है।

यह समझौता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल और महिंद्रा समिट एग्री साइंसेज लिमिटेड के सीईओ संदीप गदरे के बीच इस सप्ताह संपन्न हुआ।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ संजीव चौहान,  विभागाध्यक्ष, संयुक्त निदेशक और महिंद्रा समिट के

प्रतिनिधि सागर दरोच (डीजीएम – उत्तर एवं पूर्व भारत) एवं ललित कालिया (एसोसिएट फील्ड बायोलॉजिस्ट) उपस्थित रहे।

यह साझेदारी दोनों संस्थानों के बीच विशेषज्ञता, ज्ञान और संसाधनों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगी। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के

माध्यम से एग्रीबिजनेस क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा। समझौते के तहत संयुक्त कार्यशालाएं, संगोष्ठियां और सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा।

दोनों संस्थाएं मिलकर बागवानी, वानिकी और संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान परियोजनाएं और चयनित विषयों में छात्रों को पीएचडी. शोध कार्य करेंगी।

महिंद्रा समिट चयनित पीएच.डी. अनुसंधान को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय महिंद्रा समिट के उद्योग विशेषज्ञों को विश्वविद्यालय मानकों के अनुसार

अतिथि संकाय के रूप में मान्यता देगा तथा कंपनी के उपकरणों और उत्पादों के परीक्षण की सुविधा भी देगा।

यह सहयोग संयुक्त रूप से विकसित शोध परिणामों और नवाचारों के व्यवसायीकरण को भी बढ़ावा देगा।

महिंद्रा समिट अपने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधन प्रदान कर इन संयुक्त प्रयासों को सहयोग करेगा।

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यह समझौता तीन वर्षों के लिए वैध रहेगा और आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है। इस अवसर पर प्रो. चंदेल ने कहा कि यह सहयोग अकादमिक और औद्योगिक जगत के बीच की दूरी को

कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हम साथ मिलकर किसानों की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान विकसित करेंगे और हमारे विद्यार्थियों को उद्योग-उन्मुख ज्ञान प्रदान करेंगे।

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