भावना ठाकुर,
02 जून / सोलन।
सोलन निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा को बड़ा झटका लगा है। बीजेपी के अभेद्य किले के रूप में पहचानी जाने वाली सलोगड़ा बस्ती में एक साथ 100 से अधिक कार्यकर्ताओं का कांग्रेस में प्रवेश क्षेत्र में बड़े उथल-पुथल का संकेत है। यह केवल एक पार्टी परिवर्तन की घटना नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला रणनीतिक दांव है। जिस सलोगड़ा बस्ती से भाजपा को दशकों से अटूट समर्थन मिल रहा था, वहां के प्रमुख नेता प्रताप समेत अधिकांश स्थानीय कार्यकर्ताओं ने पाला बदल लिया है। यह बीजेपी के लिए चिंता का विषय है क्योंकि ग्रामीण बेस का कमजोर होना किसी भी पार्टी के लिए आगामी चुनावों में भारी पड़ सकता है।

सोलन से विधायक एवं स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल और कांग्रेस नेता कर्नल संजय शांडिल की जोड़ी ने सोलन में भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इन दोनों नेताओं की संयुक्त रणनीति ने बीजेपी के ग्रास रूट तंत्र को सेंध लगाने का काम किया है। पंचायत प्रधान जेडी और बीकू की भूमिका भी अहम रही है, जिन्होंने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने का बीड़ा उठाया है। सोलन में कर्नल संजय शांडिल का बढ़ता कद बीजेपी के लिए लगातार चुनौती बनता जा रहा है। पंचायत चुनावों में कांग्रेस का शानदार प्रदर्शन और अब लगातार हो रहे पार्टी-परिवर्तन से साफ है कि कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। यह घटनाक्रम बीजेपी के लिए अलार्म बेल है क्योंकि किसी पार्टी के अपने गढ़ में ही सैकड़ों कार्यकर्ताओं का पलायन गहरे असंतोष की ओर इशारा करता है। सोलन निर्वाचन क्षेत्र में जहां कांग्रेस लगातार जमीन बना रही है और वहीं भाजपा अपने गढ़ को बचाने की चुनौती से जूझ रही है।









