– तीन वर्षों में 972 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियां, 60,800 मीट्रिक टन मछली उत्पादन किया गया दर्ज
भूपेंद्र ठाकुर,
07 जून / शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश का मत्स्य क्षेत्र अभूतपूर्व प्रगति के दौर से गुजर रहा है। कभी सीमित आर्थिक गतिविधि के रूप में देखा जाने वाला यह क्षेत्र आज ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक समृद्धि का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों, आधुनिक तकनीकों और मछुआरों के कल्याण के लिए उठाए गए ठोस कदमों ने मत्स्य क्षेत्र को नई पहचान प्रदान की है।

प्रदेश सरकार द्वारा मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि, आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास तथा सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश की ब्लू इकोनॉमी का निरंतर विस्तार हो रहा है।
राज्य सरकार की योजनाओं के फलस्वरूप जनवरी 2023 से मार्च 2026 के बीच प्रदेश में कुल 60,799.66 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन दर्ज किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 972.46 करोड़ रुपये रही।
वर्ष 2023-24 में जहां 17,721.64 मीट्रिक टन मछली उत्पादन दर्ज किया गया, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 19,019.83 मीट्रिक टन और 2025-26 में रिकॉर्ड 20,005.97 मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया गया। यह सतत वृद्धि दर्शाती है कि मत्स्य क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है तथा हजारों परिवारों के लिए आय का स्थायी स्रोत बन कर उभरा है।

वर्तमान में मत्स्य क्षेत्र रोजगार और उद्यमिता का भी महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। वर्ष 2023 से अब तक विभिन्न मत्स्य विकास योजनाओं के माध्यम से कुल 1,553 रोजगार अवसर सृजित किए गए। वर्ष 2023-24 में 385, वर्ष 2024-25 में 539 तथा वर्ष 2025-26 में युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के 612 अवसर सृजित किए गए हैं।
बायोफ्लॅाक तकनीक, रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), तालाब आधारित मत्स्य पालन तथा ट्राउट फार्मिंग जैसी आधुनिक पद्धतियों ने ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खोले हैं। हैचरी, मत्स्य बीज उत्पादन, फीड मिलों तथा मछली विपणन के लिए आइस बॉक्स युक्त मोटरसाइकिलों और थ्री-व्हीलरों पर दिए जा रहे अनुदान से मत्स्य क्षेत्र को मजबूती मिली है।
जनवरी 2023 से मार्च 2026 के दौरान विभागीय ट्राउट फार्मों ने 235.16 लाख रुपये की 42.29 मीट्रिक टन ट्राउट का उत्पादन किया है। विभाग ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 338.16 लाख रुपये का राजस्व अर्जित किया है। इस अवधि में निजी ट्राउट किसानों ने लगभग 333.40 करोड़ रुपये की 5,000.87 मीट्रिक टन ट्राउट का उत्पादन किया है।








