Home राजनीतिक प्रदेश में सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ़ अविश्वास का माहौल : जयराम...

प्रदेश में सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ़ अविश्वास का माहौल : जयराम ठाकुर

12
0

-कैबिनेट रैंक वापस लेने की हालिया प्रक्रिया महज जनता की आंखों में धूल झोंकने का एक असफल प्रयास

भूपेंद्र ठाकुर/​शिमला। विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में मीडिया से औपचारिक बातचीत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान सरकार पर चौतरफा हमला बोलते हुए भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था और राज्य के प्राकृतिक व वित्तीय संसाधनों की कथित लूट को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जयराम ठाकुर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आगामी विधानसभा सत्र सरकार के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहने वाला है क्योंकि विपक्ष ने प्रदेश में ठप पड़े विकास कार्यों, कानून व्यवस्था की दयनीय स्थिति और अन्य जनहित के मुद्दों पर नियमबद्ध नोटिस दिए हैं, जिनका जवाब देना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा। पूरे प्रदेश में इस समय कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ़ अविश्वास का एक माहौल खड़ा हुआ है। जो ये दर्शाता है कि जनता इस सरकार से खुश नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर सदन को लगातार झूठ बोलकर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है और मुख्यमंत्री के भ्रामक बयानों को विशेषाधिकार हनन का मामला मानते हुए इसकी गहन जांच की आवश्यकता है। उन्होंने परंपराओं के उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के संसदीय इतिहास में संभवतः यह पहली बार हुआ है जब राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा को जानबूझकर लंबित रखा गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार इस समय भारी असमंजस और वैचारिक भटकाव की स्थिति से गुजर रही है। राज्य की चरमराती आर्थिक स्थिति को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने वित्तीय संकट और विकास कार्यों पर लगे ‘विराम’ को लेकर सरकार से जवाब मांगा है, लेकिन सत्ता पक्ष के पास इन बुनियादी सवालों का कोई ठोस उत्तर नहीं है।

Jeevan Ayurveda Clinic

जयराम ठाकुर ने प्रदेश में सक्रिय भू-माफिया और बिचौलियों पर प्रहार करते हुए कहा कि धारा 118 के नाम पर लोगों को गुमराह कर अवैध उगाही करने वाला एक बड़ा गिरोह सक्रिय है, जिसके चलते प्रदेश से उद्योगों का निरंतर पलायन हो रहा है और साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी जनहित के संस्थानों को बंद करने का सिलसिला थमा नहीं है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो और विजिलेंस विभाग को सूचना का अधिकार के दायरे से बाहर करने के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई और सवाल किया कि आखिर सरकार ऐसी कौन सी गोपनीय बातें हैं जिन्हें जनता से छिपाना चाहती है। उन्होंने तंज कसा कि जिस आरटीआई कानून को डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार पारदर्शी शासन के लिए लाई थी, वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू उसी कानून की धज्जियां उड़ाकर उसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि सत्ता स्थाई नहीं होती और अब उनके पास गिने-चुने दिन ही शेष बचे हैं। सरकारी संस्थानों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कैबिनेट रैंक वापस लेने की हालिया प्रक्रिया महज जनता की आंखों में धूल झोंकने का एक असफल प्रयास है, क्योंकि यदि सरकार वास्तव में फिजूलखर्ची रोकना चाहती थी, तो यह निर्णय माननीय न्यायालय द्वारा मुख्य संसदीय सचिवों को हटाए जाने के तुरंत बाद लिया जाना चाहिए था। अंत में उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जब सारा सरकारी खजाना अपने ‘खास मित्रों’ में लुटा दिया गया है, तब केवल सुर्खियां बटोरने के लिए किए जा रहे ऐसे दिखावटी पैंतरे जनता स्वीकार नहीं करेगी और सरकार को सदन के भीतर एक-एक पैसे के हिसाब और अपने कुशासन का जवाब देना ही होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here