हिमाचल समय, शिमला, 27 अगस्त।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि सरकार ने भ्रष्टाचार और लूट की हद मचा रखी है। जिस पराला मंडी में 10 साल पहले 50 से 83 हजार रुपए में दुकानें नीलाम हुई थी। उसी जगह बनी नई दुकानें आज 4800 में ही नीलाम हुई हैं।
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अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए नियम कानून के साथ जितना खेला जा सकता था उतना खेला गया। इस सरकार में लूट की खुली छूट दी गई है। दुकानों के बेस प्राइस बहुत कम रखे गए। ज्यादातर लोगों की एप्लीकेशन रिजेक्ट की गई जिससे अपनी मनमर्जी चलाई जा सके।
अपने चहेतों को लाभ देने के लिए प्रदेश के हितों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। किसानों और बागवानों के हितों की रखवाली करने वाली एपीएमसी सरकार के चहेतों के हितों की रखवाली करने में व्यस्त है। जिस कारण से किसान और बागबान परेशान हो रहे हैं।
सरकार के इस कदम से प्रदेश को मिलने वाले राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। यह संगठित लूट है जो सरकार द्वारा संरक्षित है। इस विषय पर जब भारतीय जनता पार्टी के विधायक रणधीर शर्मा द्वारा प्रश्न किया गया तो सरकार सही जवाब देने की बजाय इधर-उधर की बात करने लगी।
भ्रष्टाचार हुआ है, यह सरकार की जानकारी में है इसके बाद भी भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई करने की बजाय सरकार उनका बचाव कर रही थी। भ्रष्टाचार से हुई दुकानों के आवंटन को
रद्द करने का आश्वासन सरकार द्वारा नहीं दिया गया।विधानसभा के अंदर सरकार द्वारा दिए गए जवाब से असंतुष्ट होकर भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल ने सदन से वॉक आउट किया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार हर दिन प्रदेश को लूटने में लगी है। किसानों-बागवानों के हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्हें लूटने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है।
सरकार का ध्यान प्रदेश के जरूरतमंद लोगों की बजाय चुनिंदा मित्रों पर है और उन्हीं के विकास के लिए सरकार नियम कानून ताक पर रखकर काम कर रही है। सरकार के इस खेल में जो
करोड़ों रुपए की लूट हो रही है, यदि उसका लाभ एपीएमसी को मिलता तो किसानों-बागवानों का भी भला होता। अफसोस की बात यह है कि प्रदेश के हित सरकार की प्राथमिकता में है ही नहीं।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वर्तमान की व्यवस्था परिवर्तन वाली सुख की सरकार प्रदेश में घोटाले के रिकॉर्ड तोड़ रही है और भ्रष्टाचार के नए रिकॉर्ड स्थापित कर रही है। भ्रष्टाचार करने के लिए सरकार ने कोई भी जगह नहीं छोड़ी।
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एपीएमसी की तीन मंडियों पराला, टूटू और शिलारू में कुल 70 दुकानों के लिए आने वाले 133 आवेदनों में से 63 आवेदन रद्द कर दिए गए। सरकार द्वारा 70 दुकानों के लिए 70 आवेदन स्वीकार किए गए। बाकी आवेदनों को रिजेक्ट करके बेस प्राइस से चंद रुपए अधिक में दुकानें सरकार के चहेतों को आवंटित कर दी
गई। ऐसे में सवाल यह उठता है कि 10 साल पहले जहां पर 50 हजार से लेकर 83 हजार तक दुकानों की बोली लगी थी। आज वहां 4800 में ही दुकान क्यों बेची गई? भारतीय जनता पार्टी सभी दुकानों के आवंटन को रद्द करके फिर से उनके टेंडर कराए जाने और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग करती है








