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मंडी जिला में आपदा न्यूनीकरण के दृष्टिगत 36.13 करोड़ रुपए के 11 प्रस्ताव पीएसी को मंजूरी के लिए भेजे

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DC Mandi
उपायुक्त मंडी एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अपूर्व देवगन

मंडी, 05 अगस्त।

राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (एसडीएमएफ) के तहत प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा के लिए आज यहां उपायुक्त अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई।

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इसमें आगामी प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी (पीएसी) की बैठक के लिए विभिन्न आपदा न्यूनीकरण संबंधी प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में आपदा के दृष्टिगत 36.13 करोड़ रुपए से अधिक के 11 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान कर पीएसी के समक्ष अनुशंसा के लिए प्रेषित किया गया।

इन प्रस्तावों में 31.79 करोड़ रुपए से अधिक के भूस्खलन न्यूनीकरण के विभिन्न कार्य शामिल हैं। इनमें केलोधार से पटीकरी तक, मंडी-गागल-चैल-जंजैहली मार्ग पर लंबाथाच स्थित राजकीय डिग्री कॉलेज के समीप, थुनाग-पुंजोट-लाम्बसाफड़ मार्ग पर देजी गांव के समीप, मंडी-गागल-चैल-जंजैहली मार्ग पर औहण गांव के

समीप, राजकीय फार्मेसी कॉलेज, जंजैहली के प्रशासनिक भवन, स्टाफ आवास एवं छात्रावास के लिए तथा डोगरा गांव (लेहठाच पंचायत) से ठठाधार-नालोटी सड़क पर और धरवारथाच पंचायत में शिल्हीबागी-लम्बाथाच सड़क पर भूस्खलन न्यूनीकरण कार्य प्रस्तावित हैं।

साथ ही धर्मपुर के उभक गांव के लिए एप्रोच रोड तथा धर्मपुर-सरकाघाट सड़क पर स्थित सरकारी परिसंपत्तियों की बरसात के दौरान भूस्खलन एवं मलबे इत्यादि से सुरक्षा के लिए

शमन उपाय और मंडी शहर के टारना पहाड़ी क्षेत्र में एंकरिंग सिस्टम, टर्फ रिइन्फोर्समेंट मैट तथा सीमेंट कंक्रीट ब्रेस्ट वॉल के माध्यम से किए जाने वाले ढलान स्थिरीकरण कार्य भी पीएसी को प्रस्तावित किए गए हैं। 

इसके अतिरिक्त जल शक्ति विभाग रिवालसर एवं थुनाग द्वारा 4.34 करोड़ रुपए से अधिक लागत के रिवालसर क्षेत्र में सरकारी एवं निजी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए बाढ़

न्यूनीकरण उपायों के निर्माण तथा जंजैहली से पंडोह डैम जलाशय तक बाखली खड्ड एवं उसकी सहायक खड्डों तथा जिऊनी खड्ड क्षेत्र में बाढ़ मैदान क्षेत्र निर्धारण कार्य शामिल किए गए हैं। 

उपायुक्त ने पूर्व में लोक निर्माण और जल शक्ति विभाग के लिए मंजूर किए गए प्राकृतिक आपदा से बचाव के प्रस्तावों की समीक्षा भी की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्राकृतिक आपदा से बचाव के स्वीकृत कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करें। साथ ही कार्य की प्रगति,

समयबद्धता, निरीक्षण और निगरानी को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सभी कार्य आपदा से प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा और भविष्य की आपदाओं से बचाव के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और इनकी स्वीकृति से जन-संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

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