-21 पुलिस कर्मियों सहित 31 सरकारी कर्मचारियों को किया गया नौकरी से बर्खास्त
भूपेंद्र ठाकुर,
11 मई/ शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन सेंटर (एनकॉर्ड) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने 1 जून से 20 अगस्त 2026 तक प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालयों और महाविद्यालयों में ‘‘एंटी-चिट्टा जागरूकता अभियान’’ के दूसरे चरण को व्यापक स्तर पर शुरू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी संबंधित क्षेत्रों में कम से कम 10 शिक्षण संस्थानों का दौरा कर विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करेंगे। उन्होंने कहा कि दवा निर्माण और वितरण को लेकर फार्मास्यूटिकल कंपनियों द्वारा नियमों की सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित की जाएगी तथा दवाओं के किसी भी प्रकार के दुरुपयोग के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त अवैध रूप से दवाइयां बेचने वाली दुकानों के लाइसेंस रद्द किये जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज से चिट्टे के समूल नाश के लिए सरकार प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में नशे के विरूद्ध कार्रवाई और एंटी-चिट्टा जागरूकता अभियान के क्रियान्वयन के आधार पर संख्यात्मक ग्रेडिंग शामिल करने का निर्णय लिया है। उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि एंटी-चिट्टा अभियान को लेकर नियमित बैठकें आयोजित की जाएं ताकि इस समस्या को जड़ से समाप्त किया जा सके। उन्होंने जब्त किए गए वाहनों और शराब के समय पर निपटान पर भी बल दिया ताकि इनका अनावश्यक भंडारण न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चिट्टे के मामलों से संबंधित फॉरेंसिक रिपोर्ट पांच दिनों के भीतर तैयार की जानी चाहिए ताकि जांच और मुकदमों में तेजी लाई जा सके। उन्होंने पुलिस अधीक्षकों को नशा तस्करी की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने और स्थिति की नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को चिट्टा तस्करों द्वारा अवैध रूप से अतिक्रमण कर बनाई गई संपत्तियों को तोड़ने के भी निर्देश देते हुए कहा कि जिला प्रशासन द्वारा आदतन अपराधियों की मैपिंग की जाएगी।
बैठक के उपरांत, प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के गठन के बाद नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के साथ-साथ नशे के आदी लोगों के पुनर्वास पर भी ध्यान केंद्रित किया। सभी विभागों में भर्ती तथा व्यावसायिक महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के प्रवेश के लिए एंटी-चिट्टा परीक्षण अनिवार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को आरम्भ में ही यह अनुमान था कि चिट्टे का खतरा राज्य के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल नशे की समस्या नहीं है, बल्कि यह हमारे युवाओं, परिवारों, सामाजिक संरचना और हिमाचल प्रदेश के भविष्य पर सीधा हमला है।’’
श्री सुक्खू ने कहा कि 15 नवंबर 2025 को राज्य सरकार ने रिज शिमला से ‘‘एंटी-चिट्टा जन आंदोलन’’ की ऐतिहासिक शुरुआत एंटी-चिट्टा वॉकाथॉन के माध्यम से की थी। इसका उद्देश्य प्रत्येक महिला, पुरुष, पंचायत, परिवार और विशेष रूप से युवाओं को नशे के खिलाफ इस लड़ाई में सक्रिय भागीदार बनाना था। उन्होंने कहा, ‘‘आज ‘चिट्टा मुक्त हिमाचल’ अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। सरकार प्रवर्तन, आपूर्ति में कमी, मांग में कमी और नुकसान में कमी जैसे सभी पहलुओं पर एकीकृत तरीके से एक साथ कार्य कर रही है।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक लगभग 12,000 व्यक्तियों की पहचान की जा चुकी है तथा प्रदेश की 234 अति संवेदनशील पंचायतों में विशेष पुलिस और सीआईडी निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चिट्टे की समस्या से अत्यधिक प्रभावित पंचायतों की पहचान के लिए विशेष अभियान संचालित किया गया। इसके तहत शिमला में 19, सोलन में 9, सिरमौर में 20, पुलिस जिला बद्दी में 26, बिलासपुर में 27, हमीरपुर में 14, कुल्लू में 28, मंडी में 24, कांगड़ा में 15, चंबा में 13, पुलिस जिला नूरपुर में 22, पुलिस जिला देहरा में 7 तथा ऊना जिले में 10 पंचायतों की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि इन पंचायतों में कड़ी निगरानी और नशा संबंधित गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए पुलिस और सीआईडी कर्मियों की विशेष तैनाती की गई है।









