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हिमाचल की बेटियाँ बनीं देश की शान,एक ने फतेह किया एवरेस्ट, दूसरी ने दिलाया वर्ल्ड कुडो चैंपियनशिप में गोल्ड

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कृतिका शर्मा एनसीसी की होनहार कैडेट और माउंट एवरेस्ट की चोटी को फतेह करने वाली हिमाचल की सबसे कम उम्र की कैडेट।

हिमाचल समय, शिमला, 20 जुलाई।

जब देश के युवाओं में दिशा की तलाश हो, तब हिमाचल की बेटियाँ राह दिखा रही हैं।
आज बात उन दो बेटियों की, जिन्होंने ना सिर्फ अपने परिवार और संस्थान, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन किया है।

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कृतिका शर्मा एनसीसी की होनहार कैडेट और माउंट एवरेस्ट की चोटी को फतेह करने वाली हिमाचल की सबसे कम उम्र की कैडेट। बटालियन के वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व फौजी कर्नल संजय शांडिल बताते हैं

“जब मैं फौज में सेवारत था, तब कृतिका मेरी बटालियन की कैडेट थी। उसकी ट्रेनिंग आसान नहीं थी, लेकिन उसने हर स्टेज को न सिर्फ पार किया, बल्कि खुद को साबित भी किया।”

एनसीसी की कठिन चयन प्रक्रिया में कृतिका ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के दर्जनों कैडेट्स को पछाड़ते हुए अकेली हिमाचली कैडेट के रूप में नेशनल टीम में जगह बनाई। और फिर, 18 मई को माउंट एवरेस्ट फतेह कर इतिहास रच दिया।

यह सफलता इसलिए और भी प्रेरणादायक बन जाती है क्योंकि कृतिका एक सामान्य परिवार से आती हैं। जहाँ आज सोलन और अन्य जिले नशे जैसी सामाजिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं कृतिका जैसे युवा सकारात्मक दिशा और प्रेरणा का प्रतीक बनकर उभर रहे हैं।

पेमा ठाकुर सिर्फ 16 साल की उम्र, लेकिन हौसले बुलंद। सोलन की इस बेटी ने वर्ल्ड कुडो चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश और प्रदेश को गौरवान्वित किया है।

हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री सुक्खू ने पेमा को सम्मानित किया और उसके कठिन परिश्रम की प्रशंसा की। सरकार की ओर से पेमा को प्रोत्साहन राशि दिए जाने की संभावना भी जताई गई है।

कर्नल संजय शांडिल ने भावुक होते हुए कहा —

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“कृतिका और पेमा जैसी बेटियाँ सिर्फ अवॉर्ड नहीं जीततीं, वो एक पूरी पीढ़ी को जागृत करने की ताकत रखती हैं। हमें इन बेटियों पर गर्व है। ये सिर्फ उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा की जीती-जागती मिसाल हैं।”

और अपने पिता तथा प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कर्नल शांडिल ने यह भी कहा, “मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खु और स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डॉ. धनीराम शांडिल (जो मेरे पूज्य पिता भी हैं) से आशीर्वाद प्राप्त

करना मेरे लिए अत्यधिक सम्मानजनक और प्रेरणादायक है। उनकी शुभकामनाएं और आशीर्वाद निश्चित रूप से मेरी इस उपलब्धि को और भी विशेष बना देते हैं।”

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