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हिंदी दिवस पर SEDO की हिंदी दिवस पर SEDO की पत्र लेखन प्रतियोगिता के विजेता सम्मानित

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– पढ़ने, लिखने और स्वतंत्र चिंतन की संस्कृति को पुनर्जीवित करना समय की आवश्यकता — डॉ. राजेश कश्यप

भावना ठाकुर,

18 सितंबर / सोलन।

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सोलन एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (SEDO) द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित पत्र लेखन प्रतियोगिता के विजेताओं को आज एक समारोह में नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता पैदा करना ही नहीं, बल्कि विशेष रूप से युवा पीढ़ी में पढ़ने, लिखने, विचार करने और अपने विचारों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करने की आदत विकसित करना था।

कार्यक्रम में SEDO के चेयरमैन डॉ. राजेश कश्यप, सचिव मनीष सोपाल, कार्यक्रम आयोजक गीतांजलि कश्यप, पूर्व मंत्री श्री एम. एन. सोफत, सोलन पब्लिक स्कूल की एमडी प्रीति, विनोद ठाकुर, रिपुदमन, कल्पना ठाकुर, सुरेंद्र राजटा, संजीव पराशर, सुंदर सिंह ठाकुर तथा अमर सिंह गर्ग सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

प्रतियोगिता में कामिनी कल्याण, सुबाथू ने प्रथम स्थान प्राप्त किया और उन्हें ₹3,000 का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया। सोलन पब्लिक स्कूल की गौरवी ने द्वितीय स्थान प्राप्त कर ₹2,000, जबकि पीएम श्री स्कूल सोलन की प्राची ने तृतीय स्थान प्राप्त कर ₹1,000 का पुरस्कार हासिल किया।

इसके अतिरिक्त संस्कृति कॉलेज के सुमित को Early Bird Award के रूप में ₹500 तथा सोलन पब्लिक स्कूल की एनी को विशेष पुरस्कार के रूप में ₹500 प्रदान कर सम्मानित किया गया। सभी विजेताओं की रचनात्मकता, भाषा-शैली और विचारों की अभिव्यक्ति की सराहना की गई।

इस अवसर पर डॉ. राजेश कश्यप ने कहा कि तकनीक और सोशल मीडिया के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच नई पीढ़ी में नियमित रूप से पढ़ने और अपने हाथ से लिखने की आदत धीरे-धीरे कम होती जा रही है। ऐसे समय में समाज को पुनः “पढ़ने, लिखने और सोचने” की संस्कृति की ओर प्रेरित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, “लेखन केवल शब्दों को कागज पर उतारना नहीं है। जब व्यक्ति पढ़ता है तो उसे नए विचार मिलते हैं, जब वह सोचता है तो उन विचारों का विश्लेषण करता है और जब वह लिखता है तो अपने विचारों को स्पष्ट एवं प्रभावी अभिव्यक्ति देता है। यही प्रक्रिया एक जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक के निर्माण में सहायक होती है।”

डॉ. कश्यप ने कहा कि हिंदी दिवस का वास्तविक उद्देश्य केवल एक दिन हिंदी के महत्व पर चर्चा करना नहीं होना चाहिए। हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं में पढ़ने और लिखने की संस्कृति को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। विशेष रूप से विद्यार्थियों को पुस्तकों, समाचार पत्रों और अच्छे साहित्य को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज मोबाइल फोन पर संक्षिप्त संदेश और तैयार सामग्री आसानी से उपलब्ध होने के कारण स्वयं पत्र लिखने, निबंध लिखने और अपने विचारों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करने के अवसर कम हो रहे हैं। पत्र लेखन जैसी गतिविधियां बच्चों और युवाओं की भाषा, कल्पनाशक्ति, तार्किक चिंतन और अभिव्यक्ति क्षमता को मजबूत करने का सरल लेकिन प्रभावी माध्यम हैं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने भी विजेता प्रतिभागियों को बधाई देते हुए युवाओं में हिंदी भाषा, साहित्य और रचनात्मक लेखन को प्रोत्साहित करने के SEDO के प्रयास की सराहना की।

SEDO ने कहा कि संस्था का प्रयास सामाजिक विकास के साथ-साथ युवाओं में शिक्षा, रचनात्मकता, सामाजिक चेतना और सकारात्मक चिंतन को बढ़ावा देना है। भविष्य में भी विद्यार्थियों और आम नागरिकों को जोड़ते हुए इस प्रकार की साहित्यिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

कार्यक्रम के अंत में सभी विजेताओं एवं प्रतिभागियों को बधाई दी गई और युवाओं से आह्वान किया गया कि वे प्रतिदिन कुछ समय पढ़ने, सोचने और लिखने के लिए अवश्य निकालें।

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