भूपेंद्र ठाकुर,
18 सितंबर / शिमला।
भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने हिमाचल पथ परिवहन निगम द्वारा ग्रीन कार्ड, स्मार्ट कार्ड और सम्मान कार्ड की जगह हिम बस प्लस कार्ड लागू करने के निर्णय पर कांग्रेस सरकार को घेरते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस बदलाव से आम यात्रियों को वास्तव में कितना लाभ होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने यात्रियों को पहले से मिल रही रियायतों को समाप्त कर उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का रास्ता खोल दिया है और अब कैशबैक के नाम पर इस निर्णय को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि समाचार रिपोर्टों के अनुसार एचआरटीसी ने पुराने ग्रीन, स्मार्ट और सम्मान कार्ड बनाना बंद कर दिया है। इन कार्डों के माध्यम से विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों को 10 से 30 प्रतिशत तक किराया रियायत मिलती थी। अब इनके स्थान पर ₹365 की वार्षिक वैधता वाला हिम बस प्लस कार्ड लाया गया है, जिसमें सामान्य यात्रियों को पांच प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों को 15 प्रतिशत छूट देने का प्रावधान बताया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि जिन यात्रियों को पहले अधिक रियायत मिल रही थी, उन्हें नई व्यवस्था में कितना आर्थिक नुकसान होगा।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हिम बस प्लस कार्ड के अंतर्गत घोषित कैशबैक योजना की शर्तें भी कई सवाल खड़े करती हैं। योजना के अनुसार एक महीने में ₹1,001 से ₹1,500 तक की यात्रा करने पर ₹100, ₹1,501 से ₹2,000 तक ₹200, ₹2,001 से ₹3,000 तक ₹300 और ₹3,001 से ₹4,000 तक खर्च करने पर ₹500 कैशबैक देने का प्रावधान है। इसी प्रकार ₹4,001 से ₹5,000 तक ₹750, ₹5,001 से ₹7,500 तक ₹1,000, ₹7,501 से ₹10,000 तक ₹1,500 तथा ₹10,000 से अधिक मासिक यात्रा खर्च पर ₹2,000 कैशबैक देने की बात कही गई है।
संदीपनी भारद्वाज ने सवाल उठाया कि हिमाचल प्रदेश में कितने सामान्य यात्री ऐसे हैं जो हर महीने बस यात्रा पर ₹5,000 या ₹10,000 खर्च करते हैं? जो व्यक्ति महीने में ₹500 या ₹800 की बस यात्रा करता है, उसे इस कैशबैक योजना का क्या लाभ मिलेगा? उन्होंने कहा कि सरकार को ऊंचे कैशबैक के आंकड़ों का प्रचार करने के बजाय यह बताना चाहिए कि प्रदेश के कितने प्रतिशत यात्रियों को वास्तव में इस सुविधा का लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि पुरानी कार्ड व्यवस्था में यात्रियों को टिकट खरीदते समय ही निर्धारित छूट मिल जाती थी, जबकि नई व्यवस्था में पहले महीने भर यात्रा करनी होगी और निर्धारित सीमा तक खर्च करने के बाद ही कैशबैक की पात्रता बनेगी। रिपोर्ट के अनुसार कैशबैक की राशि अगले महीने की 10 तारीख को खाते में भेजने का प्रावधान है। उन्होंने पूछा कि तत्काल मिलने वाली छूट को मासिक कैशबैक में बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी और यदि कोई यात्री निर्धारित मासिक खर्च की सीमा तक नहीं पहुंचता तो उसके लिए सरकार ने क्या व्यवस्था की है?
संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में एचआरटीसी की बसें केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि लाखों लोगों की दैनिक आवश्यकता हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग, कर्मचारी, विद्यार्थी, वरिष्ठ नागरिक और कम आय वाले परिवार सरकारी बसों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में किराया रियायतों से संबंधित किसी भी निर्णय का सीधा प्रभाव आम जनता के घरेलू बजट पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पुराने कार्ड बंद करने से पहले यात्रियों और संबंधित वर्गों से कोई परामर्श किया गया था या नहीं।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हिम बस प्लस कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन और पंजीकरण की व्यवस्था के साथ वरिष्ठ नागरिकों तथा डिजिटल सुविधाओं से अपरिचित ग्रामीण यात्रियों के लिए सरल विकल्प भी उपलब्ध होने चाहिए। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नई व्यवस्था के कारण किसी भी पात्र यात्री को परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और परिवहन विभाग से मांग की कि पुराने ग्रीन, स्मार्ट और सम्मान कार्ड के अंतर्गत पंजीकृत यात्रियों की संख्या, उन्हें मिलने वाली कुल वार्षिक रियायत तथा हिम बस प्लस कार्ड से मिलने वाले अनुमानित लाभ का तुलनात्मक विवरण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही सरकार बताए कि नई व्यवस्था में किन श्रेणियों को पहले से अधिक और किन्हें कम छूट मिलेगी।
संदीपनी भारद्वाज ने कहा, “सरकार कैशबैक की बड़ी-बड़ी घोषणाएं करने के बजाय आम यात्री की जेब का हिसाब दे। यदि किसी यात्री को पहले टिकट पर तत्काल अधिक छूट मिल रही थी और अब उसे कम छूट के साथ कैशबैक की शर्तें पूरी करनी पड़ रही हैं, तो सरकार को बताना चाहिए कि इसमें यात्री का वास्तविक लाभ कहां है?”
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन का उद्देश्य केवल निगम का राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि जनता को सस्ती, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध करवाना भी है। कांग्रेस सरकार को नई कार्ड व्यवस्था की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी वर्ग की पहले से मिल रही सुविधाओं में अनुचित कटौती न हो।








