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हिमाचल प्रदेश: औद्योगिक भांग की खेती के लिए पूरी लाइसेंस व्यवस्था अधिसूचित, किसानों को प्रति बीघा 2,000 रुपये सालाना शुल्क

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भूपेंद्र ठाकुर,

25 जुलाई / शिमला।

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने औद्योगिक भांग की खेती से लेकर प्रसंस्करण, भंडारण, अनुसंधान और परिवहन तक की पूरी लाइसेंस व्यवस्था अधिसूचित कर दी है। राज्य के कर एवं आबकारी विभाग ने यह अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद प्रदेश में औद्योगिक भांग की खेती का रास्ता साफ हो गया है।

नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु

राज्य सरकार की नई व्यवस्था के तहत भांग का उपयोग केवल औद्योगिक, वैज्ञानिक और औषधीय उद्देश्यों तक सीमित रहेगा। वहीं नशीले उत्पादों के रूप में इस्तेमाल होने वाले गांजा और चरस पर प्रतिबंध यथावत रहेगा। सरकार ने भांग से जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए अलग-अलग लाइसेंस और शुल्क संरचना तय की है।

किसानों के लिए लाइसेंस शुल्क

कर एवं आबकारी विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, औद्योगिक भांग की खेती के लिए किसानों को प्रति बीघा 2,000 रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क देना होगा। सरकार का मानना है कि अपेक्षाकृत कम शुल्क रखने से अधिक किसान इस नई नकदी फसल की ओर आकर्षित होंगे। इससे पारंपरिक खेती के साथ-साथ आय के नए स्रोत भी विकसित हो सकेंगे।

उद्योगों के लिए शुल्क ढांचा

राज्य सरकार ने भांग आधारित उद्योगों के लिए भी स्पष्ट शुल्क ढांचा तय किया है:

· प्रोसेसिंग एवं मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां: भांग से फाइबर, वस्त्र, कॉस्मेटिक, निर्माण सामग्री और अन्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयों को 10 लाख रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क देना होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस क्षेत्र में केवल गंभीर निवेशक और स्थापित उद्योग ही प्रवेश करें। विनिर्माण लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 5 लाख रुपये की बैंक गारंटी भी जमा करनी होगी।
· एकीकृत लाइसेंस: जो कंपनियां खेती से लेकर उत्पाद निर्माण तक पूरी प्रक्रिया स्वयं संचालित करना चाहती हैं, उन्हें 10 लाख रुपये वार्षिक शुल्क देकर एकीकृत लाइसेंस लेना होगा।
· भंडारण लाइसेंस: भांग के भंडारण के लिए 10,000 रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क तय किया गया है।
· अनुसंधान एवं परीक्षण: अनुसंधान और विश्लेषणात्मक परीक्षण के लिए कार्य करने वाले संस्थानों को 1 लाख रुपये शुल्क देना होगा।
· परिवहन परमिट: कटाई के बाद भांग के परिवहन के लिए प्रत्येक परमिट पर 2,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

कड़े नियम और निगरानी

सरकार ने भांग उत्पादन के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। खेती खुले मैदान में नहीं, बल्कि बाड़बंदी के भीतर ही की जाएगी। लाइसेंस प्राप्त परिसर, खेती क्षेत्र और भंडारण क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, खेती की जियो-टैगिंग भी की जाएगी। विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए न्यूनतम 100 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश की आवश्यकता होगी। नियमों के उल्लंघन पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

आर्थिक संभावनाएं

सरकार को उम्मीद है कि इस नीति से राज्य के खजाने में सालाना करीब 2,000 करोड़ रुपये का राजस्व आ सकता है। भांग के रेशे से कपड़े, रस्सियां, बैग, कागज और निर्माण सामग्री तैयार की जाएगी। यह कदम किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा करेगा और राज्य को औद्योगिक भांग क्षेत्र में एक भविष्य के केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

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