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मुख्यमंत्री न मंत्रियों और विधायकों की सुनते हैं और न अधिकारी मंत्रियों की : जयराम ठाकुर

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– मुख्यमंत्री के तानाशाही रवैये से त्रस्त होकर बड़े-बड़े कांग्रेसी दिग्गज राजनीति से किनारा कर रहे हैं।

भूपेंद्र ठाकुर,

21 जुलाई / शिमला।

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शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर आई सुक्खू सरकार ने व्यवस्था के पतन और लोगों को दुःखी करने की सीमा पार कर दी है। चारों तरफ अराजकता का माहौल है। मुख्यमंत्री न अपने मंत्रियों और विधायकों की सुन रहे हैं और न ही अधिकारी अपने मंत्रियों की। जिसके कारण मंत्रियों को विवश होकर मीडिया के सामने अपना दुःख जाहिर करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली की वजह से पूरा प्रदेश एक अजीब स्थिति से गुजर रहा है। मंत्री जब किसी क्षेत्र का दौरा करने जाते हैं तो अधिकारियों को उस दौरा क्षेत्र से दूर रहने के निर्देश दे दिए जाते हैं। जब कोई मंत्री धूमधाम से किसी परियोजना का उद्घाटन करने जाता है तो उसे मंच पर ही उद्घाटन करने से रोक दिया जाता है, जिसके कारण उन नेताओं को सार्वजनिक रूप से अपमान का घूंट पीना पड़ता है।

मुख्यमंत्री की इसी कार्यशैली की वजह से कई दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने सक्रिय राजनीति से मुंह मोड़ लिया है। आने वाले समय में यह सिलसिला और तेजी से आगे बढ़ेगा। कई बड़े-बड़े कांग्रेसी नेता इसी तरह अपमानित होकर सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
जय राम ठाकुर ने कहा कि मानसून का मौसम है। बारिश की वजह से किसी अनहोनी से बचने के लिए प्रदेश भर में विशेष चौकसी की आवश्यकता है। ऐसे में अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, लेकिन यहां अधिकारी मंत्री के दौरे के दौरान भी साथ आने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में लोगों की शिकायतों का निस्तारण कैसे होगा? मंत्री किसी आवश्यक कार्रवाई हेतु किसे निर्देशित करेंगे और लोगों को कैसे लाभ होगा? इससे पहले भी 2023 में जब केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी हिमाचल के दौरे पर आए थे, उस समय भी ऐसी ही उहापोह की स्थिति बनी थी। अधिकारियों और मंत्रालय के बीच समन्वय नहीं होने की वजह से एक शर्मनाक स्थिति बन गई थी। व्यवस्था परिवर्तन की सरकार में अब यह आए दिन की बात हो गई है। गत वर्ष की त्रासदी के बाद आपदाग्रस्त क्षेत्रों के हाल जस के तस हैं। जो सड़कें टूटी थीं, वे अब भी टूटी हैं। जो ट्रांसफार्मर उखड़े थे, वे अब भी उखड़े हैं। जो पानी की योजनाएं बर्बाद हुई थीं, वे केवल अस्थायी रूप से ही बहाल हुई हैं। न लोगों को निजी तौर पर बेहतर सहायता मिली और न ही जनसुविधाएं स्थायी रूप से बहाल हुईं।

जय राम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके करीबी अधिकारियों की मनमानी का शिकार प्रदेश के ज्यादातर मंत्री और सत्ता पक्ष के विधायक हैं। सत्ता पक्ष के विधायक भी छोटे-छोटे कामों के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं होती। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि उनकी सुनवाई क्यों नहीं होती? कौन है जो अधिकारियों को ऐसा करने से रोकता है? इतना ही नहीं, खुद को बहुत ताकतवर समझने वाले मंत्री को भी मंचों के माध्यम से अधिकारियों पर कार्रवाई करने की गुहार लगानी पड़ रही है। उनके क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन पर भी वे कार्रवाई नहीं करवा पा रहे हैं। मंत्रिमंडल और कांग्रेसी विधायकों की ऐसी हालत है कि उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए भी अधिकारियों की टालमटोल और मनमर्जी का सामना करना पड़ता है। मित्र मंडल, मंत्रिमंडल पर भारी है।

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