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नई औद्योगिक नीति शीघ्र लागू होगी, उद्योगों को सस्ती बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी: मुख्यमंत्री

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– मुख्यमंत्री ने आईटी क्षेत्र में निवेश का किया आहवान, निवेश के लिए हिमाचल सबसे उपयुक्त राज्य

– पंजाब हमारा ‘बड़ा भाई’, तीन वर्षों के लिए बिजली आपूर्ति के लिए पीपीए होगा हस्ताक्षरित: मुख्यमंत्री

– टीआईई चंडीगढ़ की 23वीं वार्षिक आम बैठक की अध्यक्षता की

भूपेंद्र ठाकुर,

19 जुलाई / शिमला।

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मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने निवेशकों को हिमाचल प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि प्रदेश निवेश की दृष्टि से देश के सर्वोत्तम गंतव्यों में से एक है। मुख्यमंत्री ने शनिवार देर सायं द इंडस एंटरप्रेन्योर्स (टीआईई) चंडीगढ़ द्वारा आयोजित चंडीगढ़ लीडरशिप कॉन्क्लेव एवं 23वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को हर संभव सुविधा और सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चौबीसों घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने और निवेश आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार नई औद्योगिक नीति ला रही है, जिसके तहत बिजली दरों को कम रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तीव्र गति से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में उठाए गए कदमों के तहत प्रदेशभर में बायोचार संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त किन्नौर जिले में जियोथर्मल ऊर्जा परियोजना स्थापित की जा चुकी है।
हिमाचल प्रदेश को पावर सरप्लस राज्य के रूप में रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तीन वर्षों का पावर परचेज एग्रीमेंट किया जा रहा है। पंजाब को हिमाचल का ‘बड़ा भाई’ बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता पंजाब के साथ हमारे रिश्ते को और सुदृढ़ करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश आईटी क्षेत्र को विस्तार प्रदान करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है। राज्य सरकार डेटा स्टोरेज अधोसंरचना विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। इसके अतिरिक्त सोलन जिले के कंडाघाट में आईटी पार्क विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से पूर्व प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों से राज्य को लगभग 4,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह घटकर लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये रह गया है। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार अपनी औद्योगिक नीतियों में आवश्यक संशोधन कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का प्रतिकूल प्रभाव केवल हिमाचल प्रदेश तक ही सीमित नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी आपदाएं आ रही हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण बादल फटने की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान भी हिमाचल प्रदेश पर्यटकों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन मौसम की स्थिति को देखते हुए नदियों और खड्डों-नालों से दूर रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान भी प्रदेश में लगभग 75 लाख लोग रहते हैं। इसलिए पर्यटकों को बिना किसी भय के हिमाचल प्रदेश की यात्रा करनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश चंडीगढ़ में अपने 7.19 प्रतिशत हिस्से को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है और इस विषय पर लगातार संवाद जारी है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ से बद्दी तक रेल लाइन का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत का 50 प्रतिशत व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।

इस परियोजना के आगामी तीन वर्षों में पूर्ण होने की संभावना है, जिससे बद्दी और नालागढ़ के उद्योग विशेष रूप से लाभान्वित होंगे।
उन्होंने कहा कि पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कांगड़ा हवाई अड्डे का विस्तार किया जा रहा है, जिससे पर्यटकों और औद्योगिक क्षेत्र दोनों को लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार प्रदेश में हेलीपोर्ट का निर्माण कर रही है तथा भविष्य में सभी जिला मुख्यालयों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की जाएंगी।

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