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अपने भ्रष्टाचार व तानाशाही पर पर्दा डालने की मुख्यमंत्री की एक और कोशिश हुई नाकाम: जयराम ठाकुर

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– सुक्खू सरकार के जनविरोधी और असंवैधानिक फैसलों पर उच्च न्यायालय की रोक का स्वागत

हिमाचल समय न्यूज़,

21 मई /मंडी।

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पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान सुक्खू सरकार की मंशा, कार्यप्रणाली और उसकी तानाशाही नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि मित्रों को समर्पित यह सरकार प्रदेश के गरीब मरीजों को परेशान करने और अपने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है, लेकिन माननीय न्यायपालिका द्वारा सरकार के गलत व जनविरोधी फैसलों को रोकने के निर्णय का हम पुरजोर स्वागत करते हैं।

उन्होंने कहा कि सत्ता संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मरीजों की जेब पर डाका डालकर प्रदेश की आर्थिकी को मजबूत करना चाह रहे हैं, जो कि बेहद शर्मनाक स्थिति है क्योंकि किसी भी चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार के फैसलों के मूल में हमेशा जनहित होना चाहिए, न कि जनता को प्रताड़ित करने की भावना। नेता प्रतिपक्ष ने अखबारों में छपी खबरों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल आईजीएमसी में इलाज करवाने आने वाले गरीब मरीजों के भोजन शुल्क में करीब 3 फीसदी से अधिक की अप्रत्याशित बढ़ोतरी करके रेट को सीधे 14 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है और मरीजों को मिलने वाले दूध की मात्रा को भी आधा गिलास (50 एमएल) कर दिया गया है, जिसने राज्य के कथित सस्ते हेल्थ सिस्टम की पूरी पोल खोलकर रख दी है; अस्पताल प्रशासन द्वारा मेस को खुद न चलाकर ठेके पर सौंपने का यह तुगलकी फैसला दूर-दराज के ग्रामीण व जनजातीय क्षेत्रों जैसे किन्नौर, चंबा, सिरमौर, कुल्लू और मंडी से आने वाले गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ देगा क्योंकि जो मरीज महीने भर अस्पताल में भर्ती रहता है, उसका भोजन का बिल सीधे 420 रुपये से बढ़कर 1500 रुपये हो जाएगा, जिससे तीमारदारों को तो लंगर का सहारा मिल जाएगा लेकिन गंभीर रूप से भर्ती मरीजों के सामने जीवन-मरण और भोजन का नया आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

इसके साथ ही जयराम ठाकुर ने सरकार की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अपने भ्रष्टाचार और तानाशाही पर पर्दा डालने की मुख्यमंत्री की एक और बड़ी कोशिश पूरी तरह नाकाम हो गई है क्योंकि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के दायरे से बाहर करने की राज्य सरकार की 12 मार्च की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाकर सरकार को कड़ा आईना दिखाया है। उन्होंने याद दिलाया कि हमने पहले भी मुख्यमंत्री सुक्खू जी को आगाह किया था कि उनके ये तानाशाही फैसले कानूनी समीक्षा के सामने कभी टिक नहीं पाएंगे, लेकिन सुक्खू सरकार आए दिन ऐसे तुगलकी फैसले लेती है जिनका कोई कानूनी या संवैधानिक आधार नहीं होता और इसी वजह से माननीय न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप कर इन पर रोक लगानी पड़ती है। विपक्ष के नेता ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जो कांग्रेस पार्टी पूरे देश भर में घूम-घूमकर संविधान की दुहाई देती है और उसका हवाला देती है, वही पार्टी आज हिमाचल प्रदेश में सत्ता का खुला दुरुपयोग करके हर दिन असंवैधानिक काम कर रही है।

एक तरफ विजिलेंस में वर्ष 2024 में दर्ज भ्रष्टाचार और फर्जी दस्तावेजों के मामले को दबाने और जांच की गोपनीयता का बहाना बनाकर आरटीआई कानून का खुला उल्लंघन किया जा रहा था, तो दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे एक अधिकारी को 1 अक्टूबर 2025 को मुख्य सचिव (CS) पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपकर राज्य के सबसे संवेदनशील प्रशासनिक पद की गरिमा, संस्थागत ईमानदारी और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए गए, जिस पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार, केंद्र सरकार और मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है क्योंकि अखिल भारतीय व केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के तहत किसी भी संवेदनशील पद पर नियुक्ति से पहले विजिलेंस क्लीयरेंस अनिवार्य होती है, मगर यह सरकार नियमों को ताक पर रखकर काम कर रही है। जयराम ठाकुर ने अंत में स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश की जनता इस सरकार के जनविरोधी और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले चेहरों को देख चुकी है और माननीय न्यायालय द्वारा सरकार की इन गलत नीतियों पर लगाई गई रोक प्रदेश में कानून के शासन और न्याय की एक बड़ी जीत है।

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