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शिक्षा मंत्री ने यूनेस्को एचपी फ्यूचर्स परियोजना की स्टियरिंग कमेटी बैठक की अध्यक्षता की

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Education Minister Rohit Thakur
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने यूनेस्को एचपी फ्यूचर्स परियोजना की स्टियरिंग कमेटी बैठक की अध्यक्षता की और राज्य में शिक्षा सुधारों व भविष्य आधारित शिक्षा प्रणाली पर चर्चा की।

हिमाचल समय, शिमला, 16 जनवरी ।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां एचपी फ्यूचर्स परियोजना (हिमाचल प्रदेशः फाउंडेशन फॉर अपस्किलिंग, टीचर एक्सीलेंस, अंडरस्टैंडिंग, रेडिनेस, इक्विटी एंड सस्टेनेबिलिटी) की दूसरी स्टियरिंग कमेटी बैठक की अध्यक्षता की।

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उन्होंने समग्र शिक्षा द्वारा आयोजित बैठक के दौरान अब तक की प्रगति की समीक्षा की और राज्य सरकार के महत्त्वपूर्ण शिक्षा सुधारों पर चर्चा की। रोहित ठाकुर ने बताया कि बैठक का उद्देश्य विभिन्न गतिविधियों की प्रगति की जानकारी साझा करना, फील्ड कंसल्टेशन द्वारा प्राप्त ज्ञान पर चर्चा, कार्यान्वयन की समीक्षा और अगले चरण की प्राथमिकताएं

तय करना है। उन्होंने कहा कि पहली स्टियरिंग कमेटी बैठक सितंबर, 2025 में हुई थी, जिसके बाद सिविल सोसाइटी संगठनों, समग्र शिक्षा, एससीईआरटी और डीआईईटी के साथ कॉम्पिटेंसी-बेसड एजुकेशन पर परामर्श किए गए।

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इसके अतिरिक्त, स्कूल भ्रमण और शिक्षकों, छात्रों, नीति निर्माताओं तथा स्कूल प्रबंधन समितियों से बातचीत की गई। हिमकोस्ट जैसी संस्थाओं के माध्यम से ग्रीनिंग एजुकेशन पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि एचपी फ्यूचर्स परियोजना वर्ष 2025 में हिमाचल प्रदेश सरकार और यूनेस्को के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर के बाद शुरू की गई थी। यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठयक्रम रूपरेखा-2023 के अनुरूप है। इसका उद्देश्य राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता, प्रासंगिकता और समानता को बढ़ावा देना है, ताकि

शिक्षण-शिक्षा की प्रक्रिया में सुधार हो, स्थिरता को बढ़ावा मिले और विद्यार्थियों में सकारात्मक मूल्य विकसित हों। रोहित ठाकुर ने कहा कि इस परियोजना के तीन मुख्य स्तंभ हैं। पहला, कॉम्पिटेंसी-बेसड एजुकेशन, जो छात्रों में सृजनात्मक सोच, समस्या समाधान और व्यावहारिक कौशल विकसित करने पर बल देती है। दूसरा, खेल के माध्यम से शिक्षा है,

जिसमें खेल आधारित शिक्षा के जरिए अनुशासन, टीमवर्क, समावेश और नेतृत्व जैसे गुण विकसित किए जाते हैं। तीसरा, ग्रीनिंग एजुकेशन, जो स्कूल शिक्षा में पर्यावरण जागरूकता, स्थिरता और जलवायु अनुकूलन को शामिल करता है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि इन तीनों स्तंभों से आधारित मिलकर हिमाचल के भौगोलिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य के अनुरूप भविष्य आधारित शिक्षा प्रणाली को बल मिलता है। उन्होंने बताया कि परियोजना ने अब तक नीति निर्धारण और कक्षा आधारित शिक्षा के बीच अंतर पहचानने, शिक्षकों का विश्वास बढ़ाने, छात्रों की ईको-क्लब गतिविधियों में भागीदारी

बढ़ाने और सामुदायिक तथा स्कूल प्रबंधन समिति की भागीदारी मजबूत करने में मदद की है। राज्य भर के लगभग 200 शिक्षकों को खेल के माध्यम से मूल्य आधारित शिक्षा में प्रशिक्षित किया गया है, साथ ही वरिष्ठ माध्यमिक शारीरिक शिक्षा प्रवक्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। आने वाले वर्षों में अधिक स्कूलों को शामिल किया जाएगा

और अधिकतम प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। रोहित ठाकुर ने यूनेस्को द्वारा प्रदान किए गए सहयोग और तकनीकी विशेषज्ञता की सराहना की और कहा कि एचपी फ्यूचर्स का ‘पूरा स्कूल और पूरा समुदाय’ दृष्टिकोण शिक्षकों और छात्रों दोनों के लिए बहुत लाभकारी होगा।

उन्होंने कहा कि सतत सहयोग, संरचित फॉलो-अप और मजबूत निगरानी प्रणाली सफल प्रथाओं को बढ़ाने और राज्य की शिक्षा प्रणाली को और मजबूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश में लगातार सुधार हो रहा है। हाल ही में हिमाचल को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया और राष्ट्रीय स्तर के असर, परख और एनएएस जैसे आकलनों में राज्य ने शीर्ष स्थान हासिल किया। उन्होंने सभी हितधारकों से गुणवत्ता और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह

किया ताकि हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में आदर्श राज्य बना रहे। बैठक के दौरान एचपी फ्यूचर्स के विज़न और प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा, राजेश शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत के शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, यूनेस्को प्रतिनिधि और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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