
हिमाचल समय, शिमला, 11 जनवरी ।
“जाको राखे साइयाँ, मार सके न कोई…” यह कहावत सिरमौर जिले के हरिपुरधार में नौ जनवरी को हुए भीषण बस हादसे में तीन साल के तेजस पर सटीक साबित हुई। जिस हादसे में शायद ही कोई यात्री बिना जख्मी हुए बचा हो, उसमें इस नन्हें बच्चे को एक खरोच तक नहीं आई। और यह चमत्कार नहीं, बल्कि उसकी माँ की अनमोल ममता और हिम्मत का नतीजा था।
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दरअसल, कुफरी निवासी तीन वर्षीय तेजस अपनी माँ की गोद में बस चालक के पीछे वाली सीट पर बैठा था। वे शिमला से माघी का त्योहार मनाने कुफरी जा रहे थे। अचानक जब बस खाई की तरफ लुढ़कने लगी, तो एक माँ का ममत्व जाग उठा। तेजस की माँ को आभास हो गया कि कुछ गड़बड़ है। उन्होंने फौरन अपने बच्चे को कसकर अपनी छाती से लगा लिया, ऐसे कि दोनों एक हो गए।
लगभग 200 फुट तक बस लुढ़कती रही, पलटी और खाई में जा गिरी। इस पूरे दौरान माँ ने अपने बच्चे को शरीर से ढके रखा, उसे किसी भी तरह की चोट लगने से बचाने के लिए अपना शरीर ही ढाल बना लिया। नतीजा यह हुआ कि माँ को तो चोटें आईं, लेकिन तेजस का बाल भी बांका नहीं हुआ।
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तेजस पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है और वह अब सोलन के क्षेत्रीय अस्पताल में अपनी जख्मी माँ के साथ है। शिमला में नौकरी करने वाले उसके पिता भी अब परिवार के साथ हैं।
इस पूरे हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि माँ का प्यार और बलिदान किसी चमत्कार से कम नहीं होता। अपने बच्चे को बचाने की जिद ने मौत को भी मात दे दी। आज तेजस की मासूम मुस्कान उसकी माँ के लिए दुनिया का सबसे बड़ा इनाम है, और दुनिया के लिए मातृप्रेम की अजेय शक्ति की एक जीती-जागती मिसाल।
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