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सूखे की मार से प्रभावित चीड़ और बान वनों से नौणी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने एकत्र किए सैंपल

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नौणी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने सोलन, सिरमौर और शिमला जिलों में सूखे से प्रभावित चीड़ और बान (ओक) वनों का निरीक्षण कर वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए सैंपल एकत्र किए।

हिमाचल समय, सोलन, 27 दिसम्बर ।

डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी की विशेषज्ञ टीम ने हाल ही में सोलन, सिरमौर और शिमला जिलों में चीड़ एवं बान (ओक) वनों का क्षेत्रीय निरीक्षण किया। यह निरीक्षण वन पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहे सूखे और निर्जलीकरण के बढ़ते प्रभावों को लेकर जताई जा रही चिंताओं के मद्देनजर किया गया।

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शनिवार को पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. मानिका तोमर तथा कीट विज्ञानी डॉ. अजय शर्मा की टीम ने सोलन जिले के शालाघाट और पिपुलघाट, तथा शिमला जिले के बनूटी क्षेत्र का दौरा कर चीड़ वनों से सैंपल एकत्र किए, जो सूखे के तनाव से प्रभावित बताए जा रहे हैं।

इस दौरान वन विभाग के अधिकारी भी टीम के साथ मौजूद रहे। वैज्ञानिकों ने प्रभावित पेड़ों का विस्तृत आकलन किया तथा आगे की जांच के लिए मिट्टी और प्लांट टिश्यू के सैंपल एकत्र किए।

इसके अतिरिक्त हाल ही में डॉ. मानिका तोमर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम, जिसमें कीट विज्ञानी डॉ. सुमित वशिष्ठ सहित अन्य विशेषज्ञ सदस्य शामिल थे, ने सिरमौर जिले के बोगधार और भुटली मानल क्षेत्रों में बान (ओक) वनों का भी क्षेत्रीय निरीक्षण किया।

वहां भी वन पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहे सूखे और निर्जलीकरण को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई थीं। वैज्ञानिकों ने प्रभावित बान के पेड़ों का विस्तृत आकलन किया तथा आगे की जांच के लिए सैंपल एकत्र किए। 

इस दौरान टीम को बीडीसी चेयरमैन तेजिंदर कमल, व्यापार मंडल अध्यक्ष अशोक चौहान, प्रधानाचार्य सुशील कमल तथा अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों का सहयोग प्राप्त हुआ। प्रारंभिक जांच के दौरान वैज्ञानिकों ने

पाया कि लंबे समय से चली आ रही शुष्क मौसम की स्थिति तथा ग्रीष्म ऋतु में लगी जंगलों की आग की घटनाओं ने वर्तमान स्थिति को अधिक गंभीर बनाया है, जिसका विशेष रूप से पुराने वृक्षों पर अधिक प्रभाव पड़ा है।

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एकत्र किए गए सभी सैंपल को विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण हेतु विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं में भेज दिया गया है, ताकि वनों के क्षरण के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। प्रयोगशाला विश्लेषण के आधार पर विश्वविद्यालय सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसमें कारणों का उल्लेख करने के साथ-साथ उपयुक्त निवारण उपायों की सिफारिश भी की जाएगी।

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