हिमाचल समय, सोलन, 08 दिसंबर।
प्रदेश के सोलन जिले की कुनिहार रियासत में स्थित प्राचीन ‘शिव तांडव गुफा’ आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम है। चारों ओर हरियाली से घिरी पहाड़ियों और ऊंचे शिखरों पर बने मंदिरों वाला यह क्षेत्र अपने धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
इस गुफा की मान्यता एक रोचक पौराणिक कथा से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब भस्मासुर ने भगवान शिव से वरदान पाकर उन्हें ही भस्म करने का प्रयास किया, तो भोलेनाथ यहां छिपे थे। इस गुफा के भीतर शेषनाग ने अपने फन फैलाकर शिव की रक्षा की थी। भस्मासुर के वापस जाने के बाद, शिव यहां स्वयंभू शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए और अपने परिवार के स्मृति चिन्ह छोड़कर कैलाश चले गए।
इस गुफा की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थित प्राकृतिक स्वयंभू शिवलिंग है, जो मानव निर्मित नहीं बल्कि स्वतः उत्पन्न माना जाता है। यही कारण है कि यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण और आस्था का केंद्र बना हुआ है। भक्तों का मानना है कि यहां शिव और उनके परिवार की दिव्य उपस्थिति सदैव अनुभव की जा सकती है।
हर वर्ष महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यहां ग्यारह दिवसीय महा शिव पुराण कथा का आयोजन होता है। इस पर्व को बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है, जिसमें दूर-दूर से शिवभक्त शामिल होते हैं।
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कैसे पहुंचें:
शिव तांडव गुफाकुनिहार बस स्टैंड से मात्र आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह शिमला-नालागढ़ मार्ग पर शिमला से पश्चिम दिशा में लगभग 40 किलोमीटर दूर है। सोलन से बिलासपुर मार्ग पर भी यह करीब 40 किमी की दूरी पर है, जबकि जुब्बड़हट्टी हवाई अड्डे से इसकी दूरी लगभग 20 किलोमीटर है। यहां आने के लिए यातायात के सभी साधन आसानी से उपलब्ध हैं।
यह गुफा न केवल धार्मिक यात्रियों बल्कि प्राकृतिक सुंदरता और शांति की तलाश में आने वाले पर्यटकों के लिए भी एक आदर्श स्थल है।
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