
हिमाचल समय, सोलन, 03 दिसंबर ।
डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्योवनिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में आज तीन दिवसीय अंतर-महाविद्यालय युवा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस वार्षिक कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के चार घटक महाविद्यालयों—मुख्य परिसर स्थित औद्यानिकी महाविद्यालय और वानिकी महाविद्यालय,
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तथा नेरी और थुनाग (गोहर) स्थित औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालयों के कुल 307 छात्र-छात्राएं भाग ले रहे हैं। महोत्सव का उद्देश्य सांस्कृतिक, साहित्यिक, ललित कला और खेल गतिविधियों में छात्रों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से उनके समग्र विकास को प्रोत्साहित करना है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने मुख्य अतिथि के रूप में महोत्सव का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को ऐसा समग्र शैक्षणिक वातावरण प्रदान कर रहा है, जो शैक्षणिक उत्थान के साथ-साथ सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है।
उन्होंने कहा कि युवा महोत्सव जैसे आयोजन छात्रों के व्यक्तित्व विकास, जीवन कौशल में वृद्धि और उनकी प्रतिभाओं को पहचानने एवं निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मंच विश्व संस्कृतियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक धरोहर के प्रति सम्मान को भी सुदृढ़ करते हैं।
इससे पूर्व, विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री सिद्धार्थ आचार्य ने मुख्य अतिथि व प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने छात्रों को उत्साहपूर्वक अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने और खेल भावना को बनाए रखने का आग्रह किया। सभी चार महाविद्यालयों की टीम की आकर्षक मार्च-पास्ट से महोत्सव का शुभारंभ हुआ, जिसके बाद प्रतिभागियों को खेल भावना की शपथ दिलाई गई।
डॉ. एच.पी. संख्यान, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, ने महोत्सव में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। उद्घाटन दिवस पर स्पॉट पेंटिंग, कोलाज निर्माण, पोस्टर डिजाइन और रंगोली जैसे ललित कला प्रतियोगिताओं में छात्रों ने अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित की।
साहित्यिक प्रतियोगिताओं में वाद-विवाद, भाषण (Elocution) और तात्कालिक (Extempore) भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
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आने वाले दिनों में वन ऐक्ट नाटक, स्किट, माइम और मोनो एक्टिंग जैसी नाट्य प्रस्तुतियों के साथ-साथ लाइट वोकल, देशभक्ति गीत और भारतीय समूह गायन जैसी संगीत प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।
महोत्सव का समापन रंगारंग समूह लोक नृत्य प्रतियोगिता के साथ होगा। विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्राप्त कुल अंकों के आधार पर सर्वश्रेष्ठ महाविद्यालय का चयन किया जाएगा।
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