
मंडी/कुल्लू, 03 सितम्बर।
हिमाचल प्रदेश के मंडी और कुल्लू जिलों में भूस्खलन की कई घटनाओं ने तबाही मचा दी है, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई है और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है।
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सुंदरनगर में भीषण त्रासदी: सात लोगों की मौत
मंगलवार शाम को सुंदरनगर उपमंडल के जंगमबाग इलाके में अचानक हुए भीषण भूस्खलन ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। चंद सेकंड में पहाड़ी से आए मलबे ने दो मकानों को अपनी जद में ले लिया,
जिसमें दो परिवारों के सदस्य मलबे में दफन हो गए। राहत और बचाव कार्य के बाद अब तक सात लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं।
मृतकों की पहचना भारती (30), उनकी तीन साल की बेटी किरत, गुरप्रीत सिंह (35), सुरेंद्र कौर (56), शांति देवी (70), ओम प्रकाश (64) और राहुल (25) के रूप में हुई है।
एनडीआरएफ की टीम ने घर की छत काटकर शवों को निकाला। लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बाद अब मलबा हटाने का काम पूरा हो गया है।
एसडीएम सुंदरनगर अमर नेगी ने बताया कि सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई थी। इस घटना में एक पक्का और एक कच्चा मकान पूरी तरह तबाह हो गया,
जबकि एक अन्य मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है। दो स्कूटियाँ और एक टाटा सूमो जीप भी मलबे में दब गई थीं। उपायुक्त अपूर्व देवगन और पुलिस अधीक्षक साक्षी वर्मा राहत कार्य के दौरान मौजूद रहे।
जोगिंद्रनगर में 15 मकान क्षतिग्रस्त
इसी तरह, मंडी जिले के जोगिंद्रनगर उपमंडल की नेर घरवासड़ा पंचायत में हुए अचानक भूस्खलन से 15 मकान क्षतिग्रस्त हो गए। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
पंचायत प्रधान रीना ने बताया कि एक मवेशी की मौत की पुष्टि हुई है। खतरे को देखते हुए प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है।
कुल्लू में एनडीआरएफ जवान सहित दो लोग मलबे में दबे
कुल्लू जिला मुख्यालय के इनर अखाड़ा बाजार में बीती रात 11:45 बजे हुए भीषण भूस्खलन में दो लोग मलबे में दब गए। बताया जा रहा है

कि इनमें एक कश्मीरी मजदूर और दूसरे एनडीआरएफ के जवान हैं। एक तीसरे मजदूर ने खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई।
इस घटना के बाद से ही एनडीआरएफ, पुलिस और होमगार्ड के जवान रेस्क्यू अभियान में जुटे हुए हैं। उपायुक्त कुल्लू तोरूल एस रवीश ने
बताया कि बचाव कार्य अभी भी जारी है। माना जा रहा है कि अखाड़ा के पीछे स्थित मठ क्षेत्र से हुए भूस्खलन के कारण यह हादसा हुआ है।
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लगातार हो रही इन घटनाओं ने राज्य में मानसून सीजन में बढ़ते भूस्खलन के खतरे की गंभीर चुनौती को एक बार फिर उजागर कर दिया है।







