हिमाचल समय, शिमला, 10 अगस्त।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में स्क्रब टायफस से एक 34 वर्षीय महिला की मौत हो गई। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को बुखार के मरीजों में स्क्रब टायफस की जांच के निर्देश जारी किए हैं।
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मृतका जिला शिमला के जुब्बल क्षेत्र की निवासी थी, जिसका लंबे समय से आईजीएमसी में इलाज चल रहा था। अंतिम जांच में पुष्टि हुई कि मौत का कारण स्क्रब टायफस संक्रमण था।

सभी सामुदायिक (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) को निर्देश दिया गया है कि तेज बुखार और शरीर पर लाल दाने वाले मरीजों का तुरंत स्क्रब टायफस टेस्ट कराया जाए।
आईजीएमसी के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राहुल रॉव ने बताया: “हम स्क्रब टायफस को लेकर सतर्क हैं। संदिग्ध मामलों की तुरंत जांच की जा रही है। लोगों को इस बीमारी के लक्षणों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।”
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जुलाई-अगस्त में स्क्रब टायफस के मामले तेजी से बढ़ते हैं।
कारण: बारिश के मौसम में घास-फूस अधिक उगने से संक्रमण फैलाने वाले पिस्सू (माइट्स) की संख्या बढ़ जाती है, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
चेतावनी: समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा हो सकती है।
क्या है स्क्रब टायफस?
कारण: ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया, जो संक्रमित पिस्सू के काटने से फैलता है।
स्रोत: ये पिस्सू आमतौर पर घास, झाड़ियों, खेतों या चूहों पर पाए जाते हैं।
प्रमुख लक्षण:
तेज बुखार (104°F तक)
शरीर पर लाल चकत्ते
सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द
पिस्सू के काटने वाली जगह पर काला पपड़ीदार घावनिवारण व सतर्कता:
खेतों या घास वाले इलाकों में जाते समय पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
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शरीर पर मच्छररोधी क्रीम लगाएं।
बुखार आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और स्क्रब टायफस टेस्ट करवाएं।
इस मौत के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रदेशभर में जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। विशेषज्ञ लोगों से अपील करते हैं कि मानसून में बुखार के लक्षणों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि स्क्रब टायफस का शुरुआती इलाज ही जान बचा सकता है।







