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अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए प्रतिबद्ध उद्योग विभाग

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हिमाचल समय, शिमला, 07 अगस्त।

राज्य में अवैध खनन को रोकने के लिए उद्योग विभाग के भौमिकीय शाखा (जियोलॉजिकल विंग) ने निरीक्षण और निगरानी की प्रक्रिया को और मजबूत किया है। विभाग के कर्मचारी समय-समय पर पुलिस के सहयोग से अवैध खनन की गतिविधियों की निगरानी करते हैं।

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निदेशक उद्योग डॉ. यूनुस ने आज यहां बताया कि विभाग द्वारा अवैध खनन की संभावना और आशंका वाले क्षेत्रों का नियमित रूप से निरीक्षण किया जा रहा है।
विभाग ने पिछले कुछ समय से अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए विशेष अभियान संचालित किए हैं।

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समय-समय पर रणनीतिक रूप से संचालित किए गए अभियानों का प्रभाव ज़मीनी स्तर पर स्पष्ट नजर आ रहा है। इन अभियानों के दौरान कई अवैध खनन के मामले संज्ञान में आये हैं और सभी मामलों में भारी जुर्माना वसूला गया और कई मामलों को स्थानीय अदालतों में प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. यूनुस ने कहा कि अवैध खनन की गतिविधियों को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरूद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। इन अभियानों से जनता का विश्वास विभाग पर और अधिक बढ़ा है और अब लोग सक्रिय रूप से अवैध खनन की जानकारी दे रहे हैं।

निदेशक उद्योग ने बताया कि विभाग द्वारा संचालित किये जाने वाले विशेष अभियान जनता का विश्वास जीतने में सहायक साबित हुए हैं औैर अब भ्राता सदन, कसुम्पटी स्थित भौमकीय शाखा ( जियोलॉजिकल विंग) कार्यालय में एक शिकायत निवारण केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस केंद्र में नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक समर्पित लैंडलाइन हेल्पलाइन नंबर, व्हाट्सएप संपर्क और ईमेल सहायता की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, ताकि वे आसानी से अपनी समस्याएं दर्ज करवा सकें।

उन्होंने बताया की अब तक व्हाट्सएप, ईमेल और लैंडलाइन सहित विभिन्न माध्यमों से 350 से अधिक शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। प्राप्त शिकायतों के आधार पर विभाग ने अवैध खनन से अब तक प्रभावित और संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर ली है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में जिन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहां त्वरित कार्रवाई की गई है, जिससे विभागों को प्राप्त शिकायतों की भूमिका निर्णायक हो गयी है। हर शिकायत पर तत्काल संज्ञान लिया जा रहा है,

जो विभाग की जवाबदेह, पारदर्शी, संवेदनशील कार्यप्रणाली को प्रमाणित करता है।
उन्होंने कहा कि उद्योग विभाग राज्य की प्राकृतिक संपदाओं की सुरक्षा के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही से कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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