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लाहौल-स्पीति में इतिहास रचा, सलग्रा के किसान तोग चंद ने हींग से पहली बार तैयार किए बीज

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अटल टनल से जुड़कर बदल रही तस्वीरों वाला जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति एक नई कृषि क्रांति की ओर बढ़ रहा है। यहां के किसान न सिर्फ विविध फसलें उगाकर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं,

हिमाचल समय,लाहौल-स्पीति, 20 जुलाई।

अटल टनल से जुड़कर बदल रही तस्वीरों वाला जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति एक नई कृषि क्रांति की ओर बढ़ रहा है। यहां के किसान न सिर्फ विविध फसलें उगाकर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं,

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बल्कि अब एक अनोखी उपलब्धि ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। लाहौल घाटी के सलग्रा गांव के किसान तोग चंद ठाकुर ने देश में पहली बार हींग के पौधे से बीज तैयार करने में सफलता हासिल की है।

चार साल की कठिन मेहनत का फल

तोग चंद ठाकुर ने लगातार चार साल तक कड़ी मेहनत और लगन से हींग की खेती पर प्रयोग किया। उनकी इस अथक कोशिश का परिणाम अब सामने आया है। उनके खेतों में उगे हींग के पौधों से बीज तैयार हो गए हैं। यह उपलब्धि न सिर्फ लाहौल-स्पीति, बल्कि पूरे भारत के लिए एक मील का पत्थर है।

वैज्ञानिकों ने की सराहना, दिया सम्मान

तोग चंद की इस अभूतपूर्व सफलता को वैज्ञानिकों ने खूब सराहा है। सीएसआईआर-आईएचबीटी (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च – इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी),

पालमपुर के वैज्ञानिकों की एक टीम ने लाहौल घाटी का दौरा किया और तोग चंद के खेतों में उगी हींग की फसल का निरीक्षण किया। उन्होंने पुष्टि की कि हींग के पौधे से बीज सफलतापूर्वक तैयार हुए हैं, जो एक बड़ी वैज्ञानिक और कृषि उपलब्धि है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में हींग की खेती के प्रयास किए गए, लेकिन कहीं भी यह सफल नहीं हो पाई। ऐसे में लाहौल घाटी में पहली बार हींग के पौधे तैयार करने और उनसे बीज प्राप्त करने में तोग चंद की सफलता ने इतिहास रच दिया है।

सम्मान और राष्ट्रीय पहचान

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर ने हाल ही में किसान तोग चंद ठाकुर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इससे भी बड़ी बात यह है

कि उनकी इस सफलता को प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष भी प्रस्तुत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लाहौल-स्पीति में हींग की खेती को व्यापक बढ़ावा देना और किसानों को इसके माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं

हींग एक मूल्यवान मसाला है, जिसकी भारत में बहुत अधिक मांग है। अब तक देश को हींग के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता था।

तोग चंद ठाकुर की यह सफलता लाहौल-स्पीति ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश और समान जलवायु वाले अन्य हिमालयी क्षेत्रों में हींग की व्यावसायिक खेती की राह खोल सकती है।

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इससे किसानों को एक नई और लाभकारी फसल का विकल्प मिलेगा, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

किसान तोग चंद ठाकुर की यह जीत साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक समर्थन से हिमालय की कठिन परिस्थितियों में भी नए कीर्तिमान स्थापित किए जा सकते हैं। लाहौल-स्पीति के विकास की यह एक नई और सुगंधित कहानी है।

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