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अपना परिवार सुखी परिवार’ और ‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ 2 अक्तूबर से शुरू की जाएगी

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– मुख्यमंत्री ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के बकाया वेतन के लिए अतिरिक्त 20,000 रुपये देने की घोषणा की

– मुख्यमंत्री ने जल शक्ति विभाग में 4,000 पद भरने की घोषणा की

– अगले दो वर्षों में दुग्ध प्रसंस्करण अधोसंरचना पर 150 करोड़ रुपये खर्च करेगी राज्य सरकारः मुख्यमंत्री


हिमाचल समय न्यूज़,

15 अगस्त / हमीरपुर।

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80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह आज हमीरपुर जिले के बड़सर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और भव्य मार्च पास्ट की सलामी ली।
परेड का नेतृत्व परेड कमांडर एवं पुलिस उप-अधीक्षक प्रणव चौहान ने किया।
परेड में राज्य पुलिस, आईआरबी धौलाकुआं, आईआरबी पंडोह, जिला पुलिस हमीरपुर, हरियाणा पुलिस, महिला पुलिस, होमगार्ड तथा यातायात पुलिस की टुकड़ियों ने भाग लिया। सेवन स्टार स्कूल बणी, राजकीय डिग्री कॉलेज बड़सर, ब्राइट सन स्कूल बड़सर तथा न्यू ब्राइट सन वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़सर के विद्यार्थियों ने भी मार्चपास्ट में हिस्सा लिया। पुलिस बैंड और होमगार्ड बैंड ने स्वतंत्रता दिवस समारोह की भव्यता को और बढ़ाया।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को इसी माह वेतन बकाया के रूप में अतिरिक्त 20,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वर्ष 2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए तृतीय श्रेणी के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को इसी माह उनकी पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन के बकाया का अतिरिक्त 35 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। इसी प्रकार प्रथम और द्वितीय श्रेणी के पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशनरों को भी इसी माह उनके पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन बकाया का 15 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन भुगतानों पर सरकार 281 करोड़ रुपये खर्च करेगी। उन्होंने अगले शैक्षणिक सत्र से प्रदेश भर में 100 नए सीबीएसई स्कूल खोलने की भी घोषणा की। उन्होंने घोषणा की कि इस माह से लेकर 31 मार्च, 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले चिकित्सकों की सेवाएं जारी रहेंगी और वे 31 मार्च, 2027 को सेवानिवृत्त होंगे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की बजटीय प्रतिबद्धता के अनुरूप, एनएचएम हिमाचल प्रदेश के तहत कार्यरत लगभग 9,000 आशा कार्यकर्ताओं को दिए जाने वाले मासिक प्रोत्साहन को 5,800 रुपये से बढ़ाकर 6,800 रुपये किया जाएगा। उन्होंने इस वृद्धि को लागू करने की घोषणा की। उन्होंने घोषणा की कि एनएचएम हिमाचल प्रदेश के तहत कार्यरत वे कर्मचारी, जिन्होंने अपने वेतन के युक्तिकरण के बाद सात वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें 1 अप्रैल, 2026 से संशोधित वेतन दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, सरकार की बजटीय प्रतिबद्धता को पूरा करते हुए उन्होंने एनएचएम हिमाचल प्रदेश के तहत कार्यरत आउटसोर्स स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्टों, ऑपरेशन थिएटर सहायकों और प्रयोगशाला तकनीशियनों के लिए 25,000 रुपये प्रतिमाह तथा डेटा एंट्री ऑपरेटरों के लिए 18,000 रुपये प्रतिमाह संशोधित पारिश्रमिक की घोषणा की। संशोधित पारिश्रमिक 1 सितंबर, 2026 से प्रभावी होगा। उन्होंने जल शक्ति विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 4,000 पद भरने की भी घोषणा की।
उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों ने प्रदेश के विकास में अमूल्य योगदान दिया है और हमारी सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हमने एनपीएस कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल की है और उन्हें अन्य लाभ भी प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार मल्टी-टास्क वर्कर्स और आउटसोर्स कर्मचारियों की चिंताओं के प्रति संवेदनशील है। हम उनके मुद्दों से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और उन्हें उचित लाभ प्रदान करने के लिए नीति लाने पर विचार कर रहे हैं।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा हाल ही में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट में वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल के दौरान हिमाचल प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार को रेखांकित किया गया है। उन्होंने कहा कि हालांकि राज्य में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, लेकिन अभी और सुधार की गुंजाइश है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने माताओं और बच्चों को बेहतर एवं अधिक पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने के लिए ‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ शुरू करने का निर्णय लिया है।
श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार अब इस योजना को लागू करने के लिए तैयार है और इसका पायलट चरण 2 अक्तूबर से प्रदेश के विभिन्न जिलों के 21 आईसीडीएस ब्लॉकों में शुरू किया जाएगा। छह महीने बाद पायलट चरण की समीक्षा की जाएगी और इसके परिणामों के आधार पर योजना को पूरे हिमाचल प्रदेश में लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत माताओं एवं महिलाओं तथा 6 माह से 3 वर्ष तक की आयु के बच्चों को वर्तमान में दिए जा रहे पोषण सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। वर्तमान में दिए जा रहे चावल, दाल, तेल, बिस्किट, पंजीरी और मिल्क पाउडर को अधिक पौष्टिक एवं स्वच्छ तरीके से पैक किए गए प्रीमिक्स खाद्य पदार्थों से बेहतर बनाया जाएगा। इसके अलावा, लाभार्थियों की पसंद के अनुसार सप्ताह में तीन बार दूध या अंडे उपलब्ध करवाए जाएंगे। 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को दिए जाने वाले गर्म पके भोजन को भी उसकी पोषण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए और बेहतर बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पूरी खरीद प्रक्रिया की जिम्मेदारी जिला एवं आईसीडीएस ब्लॉक स्तर पर सौंपी जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर पारदर्शी खरीद सुनिश्चित होगी और माताओं एवं बच्चों के लिए स्वच्छ, ताजा तथा गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य जमीनी स्तर पर पोषण सहायता को मजबूत करना और पूरे हिमाचल प्रदेश में महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी बेहतर परिणाम सुनिश्चित करना है।
श्री सुक्खू ने कहा कि मैं हिमाचल प्रदेश के जेन-ज़ी युवाओं से विशेष अपील करना चाहता हूं। पारदर्शी और योग्यता आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने हजारों युवाओं को सरकारी क्षेत्र में रोजगार प्रदान किया है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसी भी भर्ती परीक्षा में पेपर लीक नहीं हुआ है। इसके विपरीत, पिछली भाजपा सरकार के दौरान पुलिस भर्ती पेपर लीक हुआ तथा कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित भर्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं, यहां तक कि प्रश्न पत्र भी बेचे गए। हमारी सरकार ने युवाओं के विश्वास के साथ धोखा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है और ऐसे कदाचार में शामिल लोगों को जेल भेजा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें ऐसा वातावरण तैयार करने की आवश्यकता है, जहां एक परिवार अपने गांव में रहकर प्रतिमाह 20,000 से 25,000 रुपये तक कमा सके। इसी उद्देश्य से ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की हमारी सोच के माध्यम से कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और स्वरोजगार के क्षेत्रों में कई नई पहल की गई हैं ताकि ग्रामीण आजीविका को मजबूत किया जा सके।
उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिले के ढगवार में लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत से प्रतिदिन 1.5 लाख लीटर क्षमता वाला प्रदेश का पहला अत्याधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है और इसका कार्य इसी वर्ष पूरा हो जाएगा। कांगड़ा, ऊना, चंबा और हमीरपुर जिलों के हजारों किसानों को इस सुविधा का सीधा लाभ मिलेगा।
उन्होंने कहा कि मैं यह भी घोषणा करता हूं कि अगले दो वर्षों में राज्य सरकार सोलन, ऊना, सिरमौर, शिमला, मंडी, कुल्लू और हमीरपुर जिलों में दुग्ध प्रसंस्करण ढांचे पर 150 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इससे डेयरी क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी तथा किसानों के लिए बेहतर अवसरों का सृजन होगा।

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