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सिरमौर के नाहन व में मक्की फसल पर संकट! रहस्यमयी कीट ने मारा हमला, आधी फसल बर्बाद, किसान परेशान

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– मडेढ़ा गांव में पौधों के तने में घुसकर कर रहा खोखला, कृषि विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार

हिमाचल समय न्यूज़,

08 जुलाई / राजगढ़।

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सिरमौर जिले के नाहन व राजगढ़ उपमंडल से किसानों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। ग्राम पंचायत टिक्कर के मडेढ़ा गांव में मक्की की फसल पर एक रहस्यमयी कीट ने हमला बोल दिया है। किसानों का दावा है कि गांव में आधे से अधिक मक्की की फसल इसकी चपेट में आ चुकी है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

किसानों के अनुसार, यह अज्ञात कीट पौधों के तने के अंदर घुसकर उन्हें अंदर ही अंदर खोखला कर देता है। कुछ ही दिनों में पौधे धीरे-धीरे सूखने लगते हैं और पूरी फसल प्रभावित हो जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पहले कभी इस प्रकार के कीट का प्रकोप नहीं देखा, जिससे वे इस नई चुनौती से निपटने में पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं।

वर्तमान में क्षेत्र में मक्की की गुड़ाई का कार्य चल रहा है। इसी दौरान बड़ी संख्या में संक्रमित पौधों की पहचान होने पर किसानों को उन्हें खेतों से निकालना पड़ रहा है। चूंकि कीट पौधे के अंदर तक पहुंच चुका है, इसलिए किसान इन प्रभावित पौधों को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने से भी डर रहे हैं, क्योंकि इसका जानवरों पर क्या प्रभाव होगा, इसकी जानकारी किसी को नहीं है

किसानों ने बताया कि उन्होंने अपनी ओर से कीटनाशकों का छिड़काव भी किया, लेकिन उससे कोई खास राहत नहीं मिली। लगातार बढ़ते संक्रमण के कारण अब फसल बचाने की उम्मीद कम होती जा रही है। यदि समय रहते इस कीट पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो पूरे क्षेत्र में मक्की की खेती बुरी तरह प्रभावित हो सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

गांव के एक किसान ने दुख जताते हुए कहा, “हमने पहले कभी ऐसा कीट नहीं देखा। यह तने के अंदर घुसकर पौधे को पूरी तरह खराब कर देता है। दवा डालने के बाद भी असर नहीं हो रहा। कृषि विभाग जल्द आकर इसकी जांच करे और हमें इसका कोई ठोस समाधान बताए।”

ग्रामीणों ने कृषि विभाग से प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कर इस कीट की वैज्ञानिक पहचान करने और प्रभावी नियंत्रण के उपाय उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का जोर देकर कहना है कि मक्की क्षेत्र की प्रमुख खाद्यान्न फसल है और यदि शीघ्र ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इस बार उनकी पूरी मेहनत बेकार हो जाएगी।

फिलहाल किसान रहस्यमयी कीट से निजात पाने के लिए विभाग की मदद की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वहीं कृषि विशेषज्ञों की भी नजर इस अज्ञात कीट पर टिक गई है। क्या विभाग समय रहते इस संकट का हल ढूंढ पाएगा, यह तो आने वाला समय बताएगा, लेकिन तब तक किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

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