संवाददाता/शिमला।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत नर्सरी से पहली कक्षा में दाखिले को लेकर उठ रहे सवालों के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रवेश की आयु सीमा को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। राज्य के शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि जिस शैक्षणिक सत्र में दाखिला लेना है, उस साल की 30 सितंबर तक निर्धारित आयु पूरी करने वाले सभी बच्चे उसी सत्र की शुरुआत में संबंधित कक्षा में प्रवेश के पात्र होंगे।विभाग को फील्ड अधिकारियों, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों से लगातार मिल रहे सवालों के बाद सरकार ने इस मामले की विस्तार से समीक्षा की। अब यह प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट कर दी गई है।नए निर्देशों के अनुसार, अब किसी भी कक्षा में प्रवेश के लिए आयु की गणना शैक्षणिक सत्र शुरू होने की तारीख के बजाय 30 सितंबर को कट-ऑफ तिथि मानकर की जाएगी। यानी अगर किसी बच्चे का जन्मदिन 30 सितंबर या उससे पहले है और वह उस तारीख तक कक्षा के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु (जैसे नर्सरी के लिए 3 वर्ष, पहली कक्षा के लिए 6 वर्ष) पूरी कर लेता है, तो वह उसी सत्र के आरंभ से दाखिला ले सकेगा। यदि किसी बच्चे का जन्म 15 अप्रैल 2023 को हुआ है और वह सत्र 2026-27 में बालवाटिका-एक (नर्सरी) में दाखिला लेना चाहता है, तो वह पात्र होगा। क्योंकि वह 15 अप्रैल 2026 को 3 वर्ष का हो जाएगा, जो कि 30 सितंबर 2026 से पहले है।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि जो बच्चे वर्तमान में प्री-प्राइमरी कक्षाओं में पढ़ रहे हैं, उन पर भी यही मानदंड लागू होगा।उदाहरण के लिए, यदि किसी बच्चे का जन्म 25 अगस्त 2020 को हुआ है और वह इस समय बालवाटिका-दो या तीन में है, तो वह सत्र 2026-27 में पहली कक्षा में जाने के लिए पात्र होगा। कारण, वह 30 सितंबर 2026 से पहले (25 अगस्त 2026 को) 6 वर्ष की आयु पूरी कर लेगा। हालांकि, ऐसे मामलों में अभिभावकों की सहमति लेना अनिवार्य होगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि नर्सरी, बालवाटिका-एक से लेकर पहली कक्षा तक के लिए यह संशोधित आयु मानदंड और 30 सितंबर की कट-ऑफ तिथि राज्य के सभी स्कूलों (सरकारी और निजी) पर अनिवार्य रूप से लागू होगी। इस फैसले से अभिभावकों की उलझन दूर होने की उम्मीद है, जो अक्सर आयु सीमा को लेकर असमंजस में रहते थे। अब सभी के लिए एक समान नियम लागू होगा, जिससे प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।









