
हिमाचल समय, शिमला, 03 जनवरी ।
उद्योग विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक ही स्थान पर सबसे अधिक हस्तनिर्मित शॉल के प्रदर्शन का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड आधिकारिक रूप से स्थापित किया है। यह गौरवपूर्ण उपलब्धि राज्य के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है और इसकी समृद्ध हथकरघा परंपरा को सम्मान प्रदान करती है।
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हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों से कारीगरों एवं महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) द्वारा तैयार की गई कुल 4,023 हस्तनिर्मित शॉल शिमला में एक साथ प्रदर्शित की गईं। यह दृश्य न केवल अत्यंत आकर्षक और रंगीन था, बल्कि प्रदेश की अद्वितीय बुनाई कला और परंपराओं का भी जीवंत प्रतिबिंब था। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स संस्था द्वारा इस रिकॉर्ड की पुष्टि कर दी गई है।
यह रिकॉर्ड प्रयास उद्योग विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 के अंतर्गत किया गया। इसका उद्देश्य स्थानीय बुनकरों के कौशल को सम्मानित करना, प्रदेश की समृद्ध हथकरघा विरासत को बढ़ावा देना तथा हिमाचली शॉल को भारत की पारंपरिक कारीगरी और सतत शिल्पकला के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करना है।
यह रिकॉर्ड उन हजारों बुनकरों की मेहनत, समर्पण और प्रतिबद्धता को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से प्रदेश को गौरवान्वित किया है। साथ ही, यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश सरकार के उन निरंतर प्रयासों को भी दर्शाती है, जिनके माध्यम से कारीगरों को प्रोत्साहन, स्थानीय शिल्प को समर्थन, युवाओं को पारंपरिक बुनाई से जोड़ने तथा हथकरघा गतिविधियों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर बल दिया जा रहा है।
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इस अवसर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का प्रमाण पत्र हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को प्रदान किया गया। कार्यक्रम में माननीय उद्योग मंत्री श्री हर्षवर्धन चौहान, प्रशासनिक सचिवगण तथा हिमाचल प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस वैश्विक उपलब्धि के माध्यम से हिमाचल प्रदेश ने एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी सांस्कृतिक शक्ति, पारंपरिक कारीगरी और कारीगर समुदाय की एकजुटता का परिचय दिया है, जिससे राज्य रचनात्मकता, विरासत और उत्कृष्टता का प्रतीक बनकर उभरा है।







