हिमाचल समय, शिमला, 13 जुलाई।
कोटखाई के चैथला गांव में वन भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ एक ऐतिहासिक और सख्त कार्रवाई देखने को मिली है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बाद, वन विभाग ने पहली बार बड़े और प्रभावशाली बागवानों के खिलाफ

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बड़े पैमाने पर अभियान चलाया। पहली बार सिर्फ छोटे किसानों के बजाय बड़े पैमाने पर कब्जा जमाने वाले प्रभावशाली बागवानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई। पिछले वर्षों में ऐसे लोगों पर कार्रवाई टलती रही थी।
यह मामला पिछले लगभग चार वर्षों से न्यायालय में लंबित था। बीच-बीच में निशानदेही जैसी प्रक्रियाओं के चलते कार्रवाई में विलंब होता रहा।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद, वन विभाग, राजस्व विभाग, पुलिस और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम ने मौके पर मौजूदगी दर्ज कराते हुए अवैध कब्जा हटाने की प्रक्रिया शुरू की।
चैथला की सफल कार्रवाई के बाद अब जुब्बल और रोहड़ू क्षेत्रों में भी वन भूमि पर कब्जे हटाने की कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है, जहां ऐसी कई शिकायतें दर्ज हैं।
हाईकोर्ट की इस कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि अब किसी भी स्तर के अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह छोटे किसान द्वारा हो या बड़े बागवान द्वारा।
यह कार्रवाई भविष्य में अन्य समान मामलों के लिए एक मिसाल बन सकती है।कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के क्षेत्र के लोगों के हथियार जमा करवा लिए हैं।
हाईकोर्ट के आदेशों का असर कुमारसैन की ग्राम पंचायत बड़ागांव के सराहन गांव में भी दिखा। यहां वन भूमि पर लगाए गए सेब, नाशपाती और चेरी के करीब 320 पेड़ काटे गए।
सराहन गांव के चार लोगों के सेब के बगीचों में यह कार्रवाई हुई और पौधे काटे गए।शेष बचे अन्य अतिक्रमणकारियों के खिलाफ आज, 14 जुलाई को कार्रवाई की जानी है।इसके अलावा,
अवैध रूप से बने एक मकान पर भी प्रशासन ने कब्जा कर लिया है। यह कार्रवाई राज्य में वन भूमि के अवैध कब्जे के खिलाफ चल रहे संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
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इससे पता चलता है कि प्रशासनिक अड़चनों और प्रभाव के दबाव के बावजूद, न्यायपालिका के दखल से बड़े स्तर पर अतिक्रमण
हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। इस कार्रवाई से संदेश गया है कि अब कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होगा।
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