भूपेंद्र ठाकुर,
09 सितंबर / मशोबरा (शिमला)।
उद्योग विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा रैंप कार्यक्रम के अंतर्गत, मशोबरा में स्वयं सहायता समूहों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का विषय था – “बाज़ार में सफलता, स्थिरता और वित्तीय प्रबंधन”।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों को उनके उत्पादों और व्यवसाय से जुड़ी उन कमियों को पहचानने में मदद करना था, जिनमें सुधार कर वे बाज़ार में अपनी पहुँच, बिक्री और स्थायित्व को बेहतर बना सकें। प्रतिभागियों को उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मूल्य निर्धारण और ग्राहकों की पसंद को समझने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही, बाज़ार की जरूरतों के अनुसार उत्पादों में सुधार करने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में 75 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर उद्योग विभाग, शिमला की विस्तार अधिकारी सुश्री समृति गुलेरिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ उद्योग विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
कार्यशाला के दौरान स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने उत्पादों, बाज़ार से जुड़ी चुनौतियों तथा सुधार की संभावनाओं पर खुलकर चर्चा की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इन समूहों को अपनी मौजूदा कमियों को समझकर सुधार करने और अपने उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी एवं टिकाऊ बनाने के लिए प्रेरित करना था। इस कार्यशाला को स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर और बाज़ार-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।








