– अतिरिक्त वित्तीय सहायता का आग्रह, उधार सीमा 3 से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने का किया अनुरोध
हिमाचल समय न्यूज़,
09 सितंबर / नई दिल्ली।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण से भेंट की और उन्हें हिमाचल प्रदेश की वर्तमान वित्तीय स्थिति तथा राज्य के सामने आ रही वित्तीय चुनौतियों से अवगत करवाया। उन्होंने राज्य की विशिष्ट भौगोलिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 से राजस्व घाटा अनुदान बंद हो जाने के कारण हिमाचल प्रदेश को लगभग 8,000 करोड़ रुपये के वार्षिक वित्तीय अंतर का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान राजस्व घाटा अनुदान में लगातार कमी किए जाने से राज्य के वित्त पर दबाव और बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, प्राकृतिक आपदाओं की अधिक संवेदनशीलता तथा बुनियादी ढांचे के निर्माण और रख-रखाव की अधिक लागत के कारण सार्वजनिक सेवाओं का संचालन एवं प्रबंधन तुलनात्मक रूप से अधिक महंगा है।
मुख्यमंत्री कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य सरकार विभिन्न वित्तीय सुधारों और राजस्व बढ़ाने के उपायों के माध्यम से अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने ने कहा कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों तथा हाल के वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से हुए भारी नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत आपूर्ति एवं विक्रेता भुगतान को एसएनए-स्पर्श मॉडल से छूट प्रदान करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लिए बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के आवंटन में वृद्धि करने तथा राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, अधिक बुनियादी ढांचा लागत और विकास संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस घटक के तहत सहायता को दोगुना करने पर विचार करने का भी अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने राज्य की उधार लेने की सीमा को वर्तमान 3 प्रतिशत से बढ़ाकर सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 4 प्रतिशत करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त वित्तीय गुंजाइश से राज्य को अपनी प्रतिबद्ध देनदारियों को पूरा करने के साथ-साथ आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं और विकासात्मक प्राथमिकताओं के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश की वित्तीय चुनौतियों का आकलन राज्य की विशिष्ट भौगोलिक एवं आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में किया जाए तथा राज्य के व्यापक हित में केंद्र सरकार से उदार वित्तीय सहायता और आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान की जाएं।








