भावना ठाकुर,
10 अगस्त / सोलन।
’भारत छोड़ो आंदोलन’ की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर सोलन जिला मुख्यालय में मजदूरों, किसानों और कर्मचारियों का ऐतिहासिक जनसैलाब उमड़ पड़ा। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU) और संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की सोलन जिला इकाइयों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महारैली में हजारों कार्यकर्ताओं, योजना श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों और किसानों ने हिस्सा लेकर प्रशासन और सरकार के खिलाफ हुंकार भरी।

प्रदर्शन की शुरुआत PWD रेस्ट हाउस सोलन से हुई। हाथों में लाल झंडे, मांगों के बैनर और बैज पहने हजारों कार्यकर्ताओं का जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए ओल्ड DC ऑफिस परिसर पहुंचा, जहां यह विशाल जनसभा में बदल गया। रैली के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी, मजदूर-विरोधी तथा कॉरपोरेट-परस्त नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की गई।
आपदा में अवसर तलाश कर श्रम अधिकारों पर हमला: वक्ताओं का आरोप
जनसभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सरकार की नीतियों पर तीखे प्रहार किए। नेताओं ने कहा कि कोरोना काल के दौरान जब पूरा देश संकट में था, तब सरकार ने “आपदा में अवसर” तलाशते हुए 4 श्रम संहिताएं (Labour Codes) थोपकर मजदूर वर्ग की कमर तोड़ दी।
नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) को बेचने, राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP 2.0) के जरिए प्राकृतिक संसाधनों को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने और ट्रांसपोर्ट नीतियों के जरिए परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने का काम कर रही है। नेताओं ने अफसोस जताया कि राज्य सरकार भी इन नीतियों का समर्थन कर रही है। इसके साथ ही मंच से सरकार की विदेश नीतियों की भी आलोचना की गई और इसे देश हित के विपरीत बताया गया।
आंदोलनों के दमन और जन-प्रतिरोध पर चर्चा
मंच से किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर हुए अत्याचारों और हाल ही में हुए छात्र आंदोलन का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को दबाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन छात्रों के अटूट संघर्ष ने सरकार को उनकी मांगें मानने पर विवश कर दिया। ठीक उसी तर्ज पर अब मजदूर, किसान और कर्मचारी भी अपने अधिकारों के लिए पीछे नहीं हटेंगे।
प्रमुख मांगें:
- 4 श्रम संहिताएं रद्द हों: चारों मजदूर-विरोधी श्रम कोड तुरंत वापस लिए जाएं, फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट खत्म हो और सभी के लिए 8 घंटे का कार्यदिवस, ट्रेड यूनियन बनाने तथा हड़ताल का संवैधानिक अधिकार बहाल रहे।
- न्यूनतम वेतन व OPS: योजना श्रमिकों (आंगनवाड़ी, आशा, मिड-डे मील) व दिहाड़ी मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन ₹42,000 प्रति माह तय किया जाए। पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल हो और स्वीकृत पदों पर पक्की भर्तियां की जाएं।
- MSP की कानूनी गारंटी: स्वामीनाथन आयोग के C2+50% फार्मूले के तहत सभी फसलों पर कानूनी गारंटी दी जाए और किसानों व गरीब परिवारों का संपूर्ण कर्ज माफ किया जाए।
- मनरेगा व निजीकरण: मनरेगा में 200 दिन का काम और ₹700 दैनिक मजदूरी मिले। विद्युत संशोधन विधेयक वापस लिया जाए और शिक्षा-स्वास्थ्य का बजट बढ़ाया जाए।

अनिश्चितकालीन आंदोलन व चक्का जाम की चेतावनी
AITUC, CITU और SKM के नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की तर्ज पर यह साझा संघर्ष मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा। यदि सरकार ने हठधर्मिता नहीं छोड़ी, तो आने वाले दिनों में सोलन सहित पूरे राज्य और देश में विकेंद्रीकृत ‘महापड़ाव’, रास्ता रोको, रेल रोको और अनिश्चितकालीन चक्का जाम जैसा उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
प्रमुख वक्ताओं की उपस्थिति
जनसभा को AITUC राज्य सचिव कॉमरेड एडवोकेट अतुल भारद्वाज, AITUC राज्य कोषाध्यक्ष अनूप परासर, CITU जिला सोलन अध्यक्ष कॉमरेड एडवोकेट राकेश कुमार, डॉ. यशवंत सिंह परमार विश्वविद्यालय नौणी AITUC प्रधान कॉमरेड हेमराज, किसान नेता कॉमरेड कुलदीप तंवर और कॉमरेड एडवोकेट नीतीश ठाकुर सहित कई प्रमुख ट्रेड यूनियन व किसान नेताओं ने संबोधित किया।








