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अत्याधुनिक व उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं का उभरता केंद्र बना हिमाचल: नरेश चौहान

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– स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए की गई 2,432 नियुक्तियां

भूपेंद्र ठाकुर,

17 जुलाई / शिमला।

Jeevan Ayurveda Clinic

मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने आज यहां पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण विरासत में मिलने के बावजूद सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के अपने संकल्प पर अडिग रही है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने आधुनिक तकनीक के समावेश, स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार और श्रमशक्ति को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 70 स्वास्थ्य संस्थानों को ‘आदर्श स्वास्थ्य संस्थान’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं और आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है ताकि लोगों को उनके घर-द्वार के समीप ही गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।


नरेश चौहान ने कहा कि हिमाचल सरकारी क्षेत्र में रोबोटिक सर्जरी शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही सरकार अस्पतालों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं से लैस कर रही है। सभी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में 3 टेस्ला एमआरआई मशीनें स्थापित की जा रही हैैं। आईजीएमसी शिमला और एआईएमएसएस चमियाना में यह सुविधा उपलब्ध करवा दी गई है। वहीं जिला एवं क्षेत्रीय अस्पतालों में 1.5 टेस्ला एमआरआई, पीईटी स्कैन, सीटी स्कैन तथा आधुनिक कैंसर उपचार प्रणाली स्थापित की जा रही है। साथ ही 16 से 20 वर्ष पुराने चिकित्सा उपकरणों को भी बदला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त ट्रॉमा, कैंसर और क्रिटिकल केयर सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और एम्स दिल्ली की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जायका) के सहयोग से स्वास्थ्य क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रही है। प्रथम चरण के तहत लगभग 1,710 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, जिनमें अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद और स्वास्थ्य अधोसंरचना का विकास शामिल है। वहीं द्वितीय चरण के लिए 1,600 करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। इन परियोजनाओं में अत्याधुनिक बाल चिकित्सा सुविधाएं, आधुनिक दंत चिकित्सालय तथा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों को और अधिक सशक्त बनाने का प्रावधान है।
नरेश चौहान ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में श्रमशक्ति को सुदृढ़ करने पर भी विशेष बल दिया जा रहा है। पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, फैकल्टी सदस्यों, नर्सों, पैरामेडिकल तथा अन्य सहायक कर्मचारियों सहित कुल 2,432 नियुक्तियां की गई हैं। इसके अतिरिक्त 218 वरिष्ठ रेजिडेंट एवं ट्यूटर विशेषज्ञ के पद भी सृजित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन पदों के मानदेय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है ताकि प्रदेश में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जा सके।


उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए चिकित्सा शिक्षा का भी व्यापक विस्तार किया गया है। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर चिकित्सा (पीजी) सीटों की संख्या 277 से बढ़ाकर 597 करना प्रस्तावित है। इसके अलावा बीएससी मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी, रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग, एनेस्थीसिया तथा ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी की सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है ताकि भविष्य के लिए कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

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