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देश का अनोखा मेला: सोलन में तीन दिन घर में नहीं बनता खाना, हर मोड़ पर मुफ्त मिलता प्रसाद

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– माता शूलिनी मेले में अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं, 40 से 50 भंडारों में मिल रहे आइसक्रीम, जूस, खीर-पूड़े समेत पकवान

भावना ठाकुर,

26 जून / सोलन।

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देवभूमि हिमाचल का सोलन शहर इन दिनों माता शूलिनी के राष्ट्रीय स्तरीय मेले के कारण भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा हुआ है। इस मेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां लगातार तीन दिनों तक शहर का कोई भी व्यक्ति अपने घर में भोजन नहीं बनाता है। यह देश का शायद एकमात्र ऐसा मेला है, जहां तीन दिनों तक भक्तों को सभी तरह के व्यंजन भंडारों में प्रसाद के रूप में मुफ्त मिलते हैं।

मेले में आस्था का ऐसा उमड़ा सैलाब कि शहर के हर मोड़ पर आपको कुछ न कुछ खाने को मिल जाता है। शहर में प्रतिदिन 40 से 50 स्थानों पर भंडारे आयोजित किए जा रहे हैं। इन भंडारों में भक्तों को आइसक्रीम, जूस, मीठी खीर, गरमा-गरम पूड़े, दाल-चावल, मटर पनीर सहित तमाम प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन प्रसाद के रूप में चखने को मिल रहे हैं।

इस मेले की एक और विशेषता यह है कि अमीर और गरीब का यहां कोई भेदभाव नहीं है। चाहे कोई बड़ा अधिकारी हो या फिर एक साधारण मजदूर, सभी को माता शूलिनी का प्रसाद एक समान रूप से मिलता है। यह ऐसा मेला है, जहां आप बिना एक पैसा खर्च किए खूब एंजॉय कर सकते हैं।

माता शूलिनी में भक्तों की अटूट श्रद्धा का यह आलम है कि वे एक-एक घंटे तक भंडारों की लंबी कतारों में खड़े रहकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

माता शूलिनी के दर्शनों के लिए आने वाले श्रद्धालु यहां भूखे नहीं रहते। यह क्रम पूरे तीन दिनों तक लगातार जारी रहता है। कहा जाता है कि माता शूलिनी शहर में तीन दिनों तक किसी भी भक्त को खाली पेट सोने नहीं देतीं। हर मोड़, हर चौराहे और हर मंदिर परिसर में प्रसाद वितरण की व्यवस्था इतनी सुदृढ़ है कि कोई भी भूखा नहीं रहता।

गौरतलब है कि सोलन शहर का नामकरण स्वयं मां शूलिनी के नाम पर पड़ा है और यह मेला बघाट रियासत की कुलदेवी की स्मृति में सदियों से मनाया जाता रहा है। इस बार भी हजारों की संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे हैं और सभी के लिए प्रसाद एवं अन्य सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था की गई है।

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