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मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान द्वारा शिमला में की प्रेस वार्ता आयोजित

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भूपेंद्र ठाकुर,

16 जून / शिमला।

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मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने आज शिमला में पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा केन्द्र में हिमाचल के हितों की पैरवी करने में असफल रहे हैं। हाल ही में हिमाचल के प्रवास पर आए जे.पी. नड्डा ने हिमाचल से जुड़े मुद्दों को नहीं उठाया, लेकिन उन्होंने पिछली भाजपा सरकार की नाकामियों पर पर्दा डालने का काम किया। आरडीजी बन्द करने के निर्णण को न्यायसंगत करार देना यह साबित करता है कि उन्होंने प्रदेश के हितों से समझौता कर लिया है। उनको यह ज्ञात होना चाहिए कि इस पहाड़ी राज्य के गठन के समय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य की राजस्व की कमी की भरपाई के लिए आरडीजी का प्रावधान किया गया था। आरडीजी हिमाचल प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है, कोई खैरात नहीं। इसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 275(1) में किया गया है और इसे बन्द करना हिमाचल के लोगों के अधिकारों के साथ कुठाराघात है।


उन्होंने कहा कि जे.पी. नड्डा केन्द्र में प्रभावशाली स्थान रखते हैं। उन्हें प्रदेश के हितों को सर्वोपरि रखते हुए प्रदेश सरकार और विपक्ष को साथ लेकर बैठक करनी चाहिए थीं और इस मामले को प्रभावशाली तरीके से केन्द्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए था लेकिन यह आर्श्चजनक है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री राजनीतिक दृष्टि से आरडीजी बन्द होने को न्यायसंगत बता रहे हैं। यह सरासर प्रदेश के लोगों के हितों के साथ खिलवाड़ है क्योंकि आरडीजी बंद होने से प्रदेश के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को आरडीजी के रूप में हज़ारों करोड़ रुपये तथा जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में 16 हज़ार करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इस सबके बावजूद पूर्व सरकार ने हिमाचल पर भारी भरकम कर्ज़ के बोझ तले दबा दिया। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को प्रदेश की आर्थिक स्थिति के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से सवाल पूछने चाहिए कि उन्होंने पांच वर्ष के कार्यकाल में प्रदेश के राजस्व को बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए थे।
नरेश चौहान ने कहा कि तमाम वित्तीय प्रतिकूलताओं के बावजूद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में वर्तमान प्रदेश सरकार ने राजस्व सृजन की दिशा में अनेक कदम उठाए हैं जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सुधार आ रहा है।


उन्होंने कहा कि जे.पी नड्डा ने कर्मचारियों के ओपीएस से जुड़े सवालों को टालने का प्रयास किया। पिछली भाजपा सरकार ने कर्मचारियों की ओपीएस की मांग को सिरे से नकार दिया था जबकि वर्तमान प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के भविष्य की चिंता करते हुए ओपीएस की बहाली की। जे.पी. नड्डा ने उनकी पार्टी की 2022 की नीति का हवाला दिया और यह नीति स्पष्ट रूप से ओपीएस के खिलाफ है। इससे यह स्पष्ट जाहिर होता है कि भाजपा कर्मचारी विरोधी पार्टी है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के 12 वर्ष के कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में करवाए जा रहे आयोजनों का उल्लेख करते हुए नरेश चौहान ने कहा कि केन्द्र सरकार जनता के मुद्दों का समाधान न करते हुए उनके मुद्दों की अनदेखी कर रही है। अलग-अलग तरह के आयोजनों से केन्द्र सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है। महंगाई, पेपर लीक, बेरोजगारी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इन सभी मुद्दों पर प्रधानमंत्री की जवाबदेही बनती है। इन 12 सालों में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के निरंतर प्रयास किए गए।

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