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आपदा प्रबन्धन को प्रभावी बनाने के लिए राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल आयोजित

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भूपेंद्र ठाकुर,

16 जून / शिमला।

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हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से आज यहां भूकंप, बादल फटने और जंगलों में आग लगने जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को और मजबूत बनाने के लिए 10वीं राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की गई।
प्रदेश में मॉक ड्रिल तीन चरणों में आयोजित की गई। पहला चरण 2 जून, 2026 को ओरिएंटेशन एवं समन्वय कार्यशाला के रूप में, दूसरा चरण 12 जून, 2026 को टेबल-टॉप अभ्यास के रूप में और अंतिम चरण आज पूरे प्रदेश में आयोजित भौतिक (फिजिकल) सिमुलेशन अभ्यास के रूप में संपन्न हुआ।


मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सुधीर बहल और विशेष सचिव, आपदा प्रबंधन डॉ. पुष्पेंद्र राणा के नेतृत्व में आयोजित मॉक ड्रिल में जिला प्रशासन, आपातकालीन प्रतिक्रिया एजेंसियों, स्वास्थ्य विभाग, सशस्त्र बलों, विभिन्न विभागों तथा सामुदायिक प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन की वर्तमान तैयारियों की समीक्षा करना तथा बड़े पैमाने की आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता को और मजबूत बनाना है।
अभ्यास के दौरान पिछले मॉक अभ्यासों में दिखाई गई प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा की गई। इनमें विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, सूचना का त्वरित आदान-प्रदान, संसाधनों की प्रभावी उपलब्धता तथा आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के बीच मजबूत सहयोग शामिल थे। इससे जिलों में आपदा संबंधी तैयारियों और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने में सहयोग मिलेगा।
इस अवसर पर कुछ ऐसे क्षेत्रों की पहचान भी की गई, जिनमें और सुधार की आवश्यकता है। इनमें आपातकालीन परिस्थितियों में संचार व्यवस्था को मजबूत बनाना, जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं को नियमित रूप से अद्यतन करना, स्वास्थ्य सेवाओं की अतिरिक्त क्षमता विकसित करना, यातायात प्रबंधन एवं निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना तथा संसाधनों और राहत दलों की त्वरित तैनाती के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करना शामिल है। निरंतर तैयारियों के लिए नियमित जिला स्तरीय मॉक अभ्यास और सिमुलेशन ड्रिल आयोजित करने पर भी बल दिया।


स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए व्यावहारिक जिला स्तरीय अतिरिक्त क्षमता तैयार करने पर विशेष बल दिया गया। इसके अंतर्गत अस्थायी बिस्तरों की व्यवस्था, आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता तथा लंबे समय तक चलने वाली आपात स्थितियों में अस्पतालों की सेवाएं सुचारू रूप से जारी रखने की योजनाओं पर चर्चा की गई।
प्रतिभागियों ने जिला और विभिन्न एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग व्यवस्था को औपचारिक रूप देने तथा आवश्यकता पड़ने पर भारी मशीनरी, विशेष राहत संसाधनों और हवाई सहायता की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।

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