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हिमाचल को कर्ज, घाटे और आर्थिक तबाही में धकेल चुकी है कांग्रेस सरकार : हर्ष महाजन

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– 4नगर निगम, जिला परिषद और पंचायत चुनावों में कांग्रेस को जनता mदे करारा जवाब : भाजपा

-बिजली बोर्ड, एचआरटीसी और सरकारी निगमों को बर्बादी की कगार पर ले गई सुक्खू सरकार

भूपेंद्र ठाकुर,

15 मई / शिमला।

भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश आज आर्थिक तबाही, कर्ज, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। उन्होंने प्रदेश की जनता से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि नगर निगम, जिला परिषद, पंचायत समिति और पंचायत चुनाव केवल स्थानीय चुनाव नहीं हैं, बल्कि हिमाचल को बचाने का एक बड़ा अवसर हैं।

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हर्ष महाजन ने कहा कि आज हिमाचल की जनता के पास एक ऐसा लोकतांत्रिक मौका है जो पांच वर्षों में एक बार आता है। उन्होंने कहा कि भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को वोट देकर जनता कांग्रेस सरकार को ऐसा राजनीतिक संदेश दे कि प्रदेश की जनता अब झूठ, धोखे और कुशासन को स्वीकार नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने ढाई से चार वर्षों के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश को आर्थिक रूप से पूरी तरह कमजोर कर दिया है। जनता पर अत्याचार, महंगाई, बढ़ते टैक्स और विकास कार्यों की बंदी ने प्रदेश को संकट में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि आज हर वर्ग — कर्मचारी, बेरोजगार, किसान, महिला, व्यापारी और युवा — कांग्रेस सरकार से परेशान है।

हर्ष महाजन ने कहा कि यदि किसी को उनकी बात पर विश्वास नहीं है तो वह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट पढ़ ले। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 12 निगम और बोर्ड इस समय ₹6454 करोड़ से अधिक के घाटे में चल रहे हैं। अकेला बिजली बोर्ड ₹3246 करोड़ से अधिक घाटे में पहुंच चुका है, जबकि हिमाचल पथ परिवहन निगम पर लगभग ₹10,966 करोड़ और वित्त निगम पर ₹180 करोड़ से अधिक का बोझ है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल तो कर दी, लेकिन उसके लिए अलग से कोई पेंशन फंड तक नहीं बनाया। इसका अर्थ यह है कि आने वाले वर्षों में पेंशन का पूरा बोझ सीधे प्रदेश के खजाने पर पड़ेगा और भविष्य में आर्थिक संकट और गंभीर होगा।

हर्ष महाजन ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2023-24 में हिमाचल प्रदेश को ₹5558 करोड़ का राजस्व घाटा हुआ, जबकि राजकोषीय घाटा ₹11,266 करोड़ तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि एफआरबीएम एक्ट के अनुसार यह सीमा 3.5 प्रतिशत होनी चाहिए थी, लेकिन हिमाचल में यह 5.43 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसका साफ अर्थ है कि सरकार जितना कमा रही है उससे कहीं अधिक खर्च और कर्ज ले रही है।

उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब सरकार पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज ले रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की कुल आय का 72 प्रतिशत हिस्सा केवल वेतन, पेंशन और ब्याज चुकाने में ही खर्च हो रहा है। ऐसे में विकास कार्यों, युवाओं के रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए पैसा कहां से आएगा?

भाजपा सांसद ने कहा कि प्रदेश के सात बड़े सरकारी उपक्रमों की नेटवर्थ अब नकारात्मक हो चुकी है, यानी घाटा इतना बढ़ गया है कि उनकी मूल पूंजी तक समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड और परिवहन निगम जैसे संस्थान भारी कर्ज में डूब चुके हैं और अंततः इसका बोझ प्रदेश की जनता पर ही डाला जाएगा।

हर्ष महाजन ने कहा कि यह केवल आंकड़ों का मामला नहीं है, बल्कि हिमाचल प्रदेश की भयावह वास्तविकता है। उन्होंने कहा कि यदि आज जनता नहीं जागी तो आने वाले समय में न युवाओं के लिए रोजगार बचेगा और न विकास के लिए बजट।

उन्होंने प्रदेशवासियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि यह चुनाव केवल उम्मीदवार चुनने का नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश के भविष्य को बचाने का चुनाव है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने प्रदेश को तबाही की ओर धकेल दिया है और अब समय आ गया है कि जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब दे।

हर्ष महाजन ने कहा कि भाजपा जनता के बीच विकास, पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों को लेकर जा रही है, जबकि कांग्रेस केवल झूठी गारंटियों, आर्थिक अव्यवस्था और राजनीतिक भ्रम फैलाने का काम कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश की जनता इस चुनाव में कांग्रेस को करारा जवाब देगी।

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