Home राजनीतिक ईवीएम पर सीएम का बयान उनकी हताशा का प्रमाण: अनुराग सिंह ठाकुर

ईवीएम पर सीएम का बयान उनकी हताशा का प्रमाण: अनुराग सिंह ठाकुर

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-ईवीएम से चुन कर बने मुख्यमंत्री की टिप्पणी अशोभनीय: अनुराग सिंह ठाकुर

हिमाचल समय न्यूज़,

06 मई।

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पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के बंगाल में भाजपा की जीत के बाद ईवीएम पर दिए गए बयान को पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष में हर हार के बाद ईवीएम और संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्न खड़ा करना अपनी आदत बना लिया है जोकि उनकी हताशा और निराशा को दिखाता है।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ राजनीतिक लड़ाई विचारों और जनसमर्थन से लड़ी जाती है, संस्थाओं और व्यवस्थाओं को बदनाम करके नहीं। यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष अपनी हर हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं और ईवीएम को बदनाम करने लग जाता है। जनभावनाओं और जनादेश का अपमान विपक्ष ने अपनी आदत बना ली है। कल बंगाल समेत तीन राज्यों में भाजपा की प्रचंड विजय वहाँ की जनता का जनादेश था मगर हिमाचल के मुख्यमंत्री का ईवीएम के प्रति अविश्वास प्रकट करना उनकी हताशा को दिखाता है। सुक्खू जी बंगाल, आसाम में ईवीएम हैक मानते हैं मगर केरलम में उनकी पार्टी के गठबंधन की जीत पर चुप्पी साध लेते हैं। मुख्यमंत्री बतायें आख़िर यह दोहरा चरित्र क्यों?”

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ सुक्खू जी ईवीएम व संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़े करने से पहले यह क्यों भूल जाते हैं कि वो भी उसी ईवीएम और प्रक्रिया से चुनकर आए हैं जैसे कि भाजपा शासित राज्यों की सरकारें चुन कर आई हैं। कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल में कांग्रेस की सरकारें आख़िर उसी चुनावी प्रक्रिया से चुन कर बनी हैं तो फिर भाजपा की विजय पर इतनी हाय-तौबा क्यों? दरअसल विपक्ष अपनी नाकामी और जनता द्वारा बार-बार नकारे जाने को, अपनी कमी छिपाने के लिए ऐसी बातें कर जनता का ध्यान भटकाना चाहता है”

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा “ पिछले 10 सालों में मोदी सरकार ने ब्रिटिश जमाने के हजारों पुराने कानूनों को हटा दिया है, साथ ही आजाद भारत में लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए नए कानून बनाए गए हैं। चुनाव आयोग ने वोटरों को पूरे अधिकार देने के लिए चुनावी सुधार किए हैं। इसका कोई विरोध नहीं होना चाहिए। कांग्रेस द्वारा इन सुधारों का विरोध बेबुनियाद है। राहुल गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस 99 चुनावों में हार का मुंह देख चुकी है। 2027 तक राहुल गांधी 100 चुनावी हार के शतक का रिकॉर्ड बनायेंगे। जब चुनाव हारते हैं, तो वे ईवीएम पर सवाल उठाते हैं या मतदाताओं को दोष देते हैं। पार्टी के भीतर भी राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाए जाते हैं। कांग्रेस ने पहले कहा कि ईवीएम मशीन के साथ हेराफेरी होती है, ईवीएम बैन करो, बैलेट पेपर लाओ, फिर कहा ईवीएम को रिमोटली हैक किया जा सकता है। फिर कहा वीवीपैट 100 प्रतिशत चेक सुनिश्चित करो। कांग्रेस ने आत्मचिंतन नहीं किया, लेकिन ईवीएम से लेकर संवैधानिक संस्थाओं तक पर आरोप लगाती रही। मैं विपक्ष को यही कहूंगा, धूल चेहरे पर थी और आप आईना साफ करते रहे”

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