भावना ठाकुर,
30 अप्रैल/सोलन।
गुरुकुल इंटरनेशनल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सोलन के पावन प्रांगण में दिनांक 30 अप्रैल 2026 को ‘श्रमिक दिवस’ अत्यंत गरिमा, उत्साह और आत्मीयता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन सुनील गर्ग, दिनेश गर्ग उपस्थित रहे।
गुरुकुल में यह भावना पूर्णतः स्पष्ट है कि यहाँ कार्यरत किसी भी व्यक्ति को ‘श्रमिक’ नहीं, बल्कि ‘सहयोगी’ माना जाता है। वे केवल अपने दायित्वों का निर्वहन करने वाले कर्मचारी नहीं, बल्कि गुरुकुल परिवार के सशक्त स्तंभ हैं, जिनके समर्पण, निष्ठा और अथक परिश्रम से ही संस्थान की प्रत्येक गतिविधि सुचारु रूप से संचालित होती है। उनके योगदान को न केवल स्वीकार किया जाता है, बल्कि हृदय से सम्मान और आदर भी दिया जाता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ सहयोगियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा और पावनता से आलोकित कर दिया। इसके पश्चात विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत एक प्रभावशाली नृत्य-नाटिका ने सभी का मन मोह लिया, जिसमें सहयोगियों के जीवन, उनके संघर्ष और उनके अमूल्य योगदान को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ दर्शाया गया। इस प्रस्तुति ने उपस्थित सभी को यह अनुभूति कराई कि हमारे जीवन को सहज और सुव्यवस्थित बनाने में इन सहयोगियों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
इसके उपरांत आयोजित सम्मान समारोह कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा, जिसमें सहयोगियों को उनके उत्कृष्ट कार्य, अनुशासन और निष्ठापूर्ण सेवा के लिए विशेष उपाधियों एवं सम्मान-पत्रों से सम्मानित किया गया। यह क्षण उनके लिए गर्व और आत्मसम्मान से परिपूर्ण रहा। विद्यार्थियों द्वारा आयोजित मनोरंजक खेलों और गतिविधियों ने पूरे वातावरण को उल्लास और आनंद से भर दिया, जिसमें सभी सहयोगियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।
कार्यक्रम के मध्य में गुरुकुल की उस महान परंपरा को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया, जिसमें ‘अतिथि देवो भव’ के आदर्श को सदैव जीवंत रखा जाता है। इसी भावना के साथ सहयोगियों का सत्कार किया गया और उनके सम्मान में किसी प्रकार की कमी नहीं रखी गई।
समारोह के अंतर्गत सभी सहयोगियों को सप्रेम उपहार भेंट किए गए तथा उनके लिए विशेष रूप से स्नेहपूर्वक भोजन (लंच) की भी व्यवस्था की गई, जिससे उनके प्रति सम्मान और अपनत्व की भावना और अधिक प्रगाढ़ हुई।
कार्यक्रम के अंत में चेयरमैन दिनेश गर्ग ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में सहयोगियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा उनके निरंतर सहयोग, समर्पण और संस्थान के प्रति निष्ठा के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि किसी भी संस्था की सच्ची शक्ति उसके वे सहयोगी होते हैं, जो निस्वार्थ भाव से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।
यह आयोजन न केवल एक उत्सव के रूप में सफल रहा, बल्कि गुरुकुल की समृद्ध परंपराओं, मानवीय मूल्यों और पारस्परिक सम्मान की भावना को सुदृढ़ करने वाला एक प्रेरणादायक एवं स्मरणीय अनुभव भी सिद्ध हुआ।









