भावना ठाकुर/सोलन।
कंडाघाट केवल एक साधारण कस्बा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र अपनी समृद्ध ऐतिहासिक, प्रशासनिक और सामाजिक पहचान के लिए जाना जाता रहा है। कंडाघाट लंबे समय तक SDM मुख्यालय रहा है और ऐतिहासिक रूप से PEPSU कोहिस्तान (Patiala and East Punjab States Union – Kohistan) के पुराने जिला मुख्यालय के रूप में भी इसकी विशेष पहचान रही है।
ऐसे गौरवशाली इतिहास वाले क्षेत्र की प्रशासनिक स्थिति से जुड़े किसी भी निर्णय—विशेषकर नगर पंचायत के डिनोटिफिकेशन जैसे संवेदनशील विषय—पर बिना व्यापक जनपरामर्श के आगे बढ़ना उचित नहीं है।
मैं सभी संबंधित नेताओं और प्रशासन से आग्रह करता हूँ कि वे कंडाघाट की ऐतिहासिक गरिमा और स्थानीय जनता की भावनाओं का सम्मान करें। लोकतंत्र में किसी भी बड़े निर्णय से पहले जनता की राय लेना अनिवार्य है।
नेतृत्व का दायित्व है कि वह ज़मीनी स्तर पर संवाद स्थापित करे और पारदर्शी तरीके से निर्णय ले, न कि दबाव या जल्दबाज़ी में।
कंडाघाट के लोगों की भावनाओं, उनकी पहचान और विकास की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए ही कोई भी निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र का संतुलित और सम्मानजनक विकास सुनिश्चित हो सके।





