भूपेंद्र ठाकुर/शिमला।
जिला शिमला पुलिस ने मशोबरा क्षेत्र में हुए अपहरण एवं फिरौती मांगने के प्रयास के सनसनीखेज मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। पहले से गिरफ्तार दो आरोपियों के बाद अब पुलिस ने इस साजिश के मुख्य सूत्रधार को भी गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान मनीश वर्मा उर्फ मनु (46 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय हीरा सिंह के रूप में हुई है। उसका मूल निवास गांव जघेड़ी, डाकघर एवं तहसील ठियोग, जिला शिमला है, जबकि वर्तमान में वह चकदेहल भट्टाकुफर, शिमला में निवास करता है। आरोपी पेशे से प्रॉपर्टी डीलर और ठेकेदार है।
पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ कि आरोपी मनु ही पूरे अपराध का मास्टरमाइंड था। उसने पीड़ित आर्यन की दिनचर्या पर लगातार नजर रखी थी। उसके आने-जाने के समय और स्थानों की विस्तृत जानकारी जुटाकर योजनाबद्ध तरीके से अपहरण की साजिश रची गई। आरोपी ने अपने सह-आरोपियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम देने की योजना बनाई थी। पुलिस की सटीक कार्रवाई और छापेमारी के दौरान आरोपी मनु के कब्जे से एक अवैध हथियार और 10 जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए हैं।
आपराधिक इतिहास:
आरोपी मनु कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि उसका आपराधिक इतिहास काफी पुराना और गंभीर रहा है। उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं:
- एफआईआर नंबर 145/2006: धली थाना में एनडीपीएस एक्ट के तहत, जिसमें उससे 830 ग्राम चरस बरामद की गई थी।
- एफआईआर नंबर 57/2009: ठियोग थाना में, जिसमें उसने चौकीदार को बांधकर लकड़ी (टिंबर) की चोरी की थी।
- एफआईआर नंबर 44/2009: जुब्बल थाना में आईपीसी और वन अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज।
- एफआईआर नंबर 102/2019: सदर शिमला थाना में सेंध लगाने और चोरी के मामले में दर्ज।
- एफआईआर नंबर 46/21: देहा थाना में, जिसमें आरोपी पर पीड़ित का अपहरण कर मारपीट करने का आरोप है।
शिमला पुलिस की सतर्कता, तकनीकी विश्लेषण और निरंतर प्रयासों से पहले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था और अब मुख्य साजिशकर्ता को भी दबोच लिया गया है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है। शिमला पुलिस ने आमजन को आश्वस्त किया है कि इस तरह के जघन्य अपराधों के प्रति शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाई जा रही है और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।









