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किसानों को लहसुन एवं मसाला फसलों की व्यावसायिक खेती के गुर बताए गए

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Lahsun ki Vyavsayik Kheti Kullu,
कुल्लू में लहसुन और मसाला फसलों की व्यावसायिक खेती पर जिला स्तरीय संगोष्ठी आयोजित की गई। एमआईडीएच के तहत वैज्ञानिक खेती, बीज उत्पादन और लाभप्रद तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया।

हिमाचल समय, सोलन, 12 जनवरी ।

क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा, जिला कुल्लू, में “कुल्लू में लहसुन एवं मसाला फसलों की व्यावसायिक खेती” विषय पर दो दिवसीय जिला स्तरीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। 

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इस कार्यक्रम का आयोजन डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय,नौणी के बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) परियोजना के अंतर्गत किया गया, जिसे वर्तमान में विभाग द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है।

संगोष्ठी में कुल्लू जिले के विभिन्न क्षेत्रों से 100 से अधिक प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया, जो क्षेत्र में लहसुन एवं मसाला फसलों की व्यावसायिक खेती के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक खेती पद्धतियों, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन तथा उन्नत कृषि प्रबंधन तकनीकों को बढ़ावा देकर उत्पादकता एवं लाभप्रदता में वृद्धि करना था।

कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), कुल्लू के हेड डॉ. सुरेंद्र ठाकुर ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उन्होंने कुल्लू घाटी की कृषि-जलवायु परिस्थितियों में लहसुन एवं मसाला फसलों की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला

तथा किसानों को उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकों को अपनाकर अधिक लाभ अर्जित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण बीज, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा बाजारोन्मुख उत्पादन प्रणाली के महत्व पर बल दिया।

बीज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. एन.के. भरत ने संगोष्ठी के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए फसल उत्पादकता बढ़ाने में गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने मसाला फसलों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बीज आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई।

क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा के सह-निदेशक डॉ. बी.एस. ठाकुर, ने जमीनी स्तर पर उन्नत तकनीकों के तेजी से प्रसार हेतु अनुसंधान–प्रसार–किसान समन्वय को मजबूत करने पर बल दिया।

वहीं वरिष्ठ वैज्ञानिक (बीज प्रौद्योगिकी) डॉ. अशोक ठाकुर ने लहसुन एवं अन्य मसाला फसलों में प्रमाणित बीज उत्पादन की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा क्षेत्र में चयनित एक्जॉटिक मसालों की खेती की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।

तकनीकी सत्रों में लहसुन एवं प्रमुख मसाला फसलों की उत्पादन तकनीक, पौध संरक्षण उपाय, बीज उत्पादन तकनीक, तथा मृदा एवं जल प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया। केवीके कुल्लू, क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र बजौरा एवं हरेक के विशेषज्ञों ने विस्तृत व्याख्यान देते हुए उन्नत किस्मों, कीट एवं रोग प्रबंधन, पोषक तत्व प्रबंधन, 

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सिंचाई पद्धतियों तथा फसलोपरांत प्रबंधन संबंधी व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। विशेष किसान–वैज्ञानिक संवाद सत्र का आयोजन भी किया गया, जिसमें किसानों ने रोग प्रबंधन, बीज उपलब्धता, भंडारण, विपणन एवं सरकारी योजनाओं से संबंधित प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने उनके प्रश्नों का विस्तृत एवं क्षेत्र-विशिष्ट समाधान प्रस्तुत किया।

मसाला फसल उत्पादन में नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्य के लिए तीन प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया। समापन दिवस पर प्रतिभागियों को केवीके कुल्लू एवं बजौरा स्थित अनुसंधान केंद्रों के प्रायोगिक खेतों का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने प्रचलित अनुसंधान परीक्षणों, उन्नत किस्मों तथा वैज्ञानिक फसल प्रबंधन के प्रदर्शन का अवलोकन किया।

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