
हिमाचल समय, सोलन, 19 जनवरी ।
शूलिनी विश्वविद्यालय ने अपने कर्मचारियों के बच्चों के लिए शीतकालीन शिविर का आयोजन किया, जो बच्चों को मनोरंजक और सार्थक गतिविधियों के माध्यम से पोषित करने की उसकी परंपरा को जारी रखता है। यह शिविर 5 से 16 जनवरी तक सतत विकास एवं सामुदायिक सहभागिता की निदेशक श्रीमती पूनम नंदा के नेतृत्व में आयोजित किया गया।’
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लगातार तीसरे वर्ष आयोजित इस शीतकालीन शिविर का उद्देश्य सीखने, रचनात्मकता और शारीरिक गतिविधियों को मिलाकर बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है। इस वर्ष शिविर में सतत विकास और रचनात्मकता पर विशेष जोर दिया गया, जिससे बच्चों को आकर्षक और अंतःक्रियात्मक अनुभवों के माध्यम से सीखने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
पूरे शिविर के दौरान, विद्यार्थियों ने योग, नृत्य, संगीत, अभिनय और नाटक, इनडोर और आउटडोर खेल, और बेकार सामग्रियों का उपयोग करके कला और शिल्प परियोजनाओं सहित कई गतिविधियों में भाग लिया। इन सुविचारित गतिविधियों ने युवा प्रतिभागियों में रचनात्मकता, शारीरिक क्षमता, टीम वर्क और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने में मदद की।

समापन दिवस पर, बच्चों ने अपने माता-पिता और विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के लिए आयोजित एक प्रदर्शनी में गर्वपूर्वक अपनी हस्तनिर्मित कृतियों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी शिविर के दौरान प्राप्त रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सीखने के परिणामों को दर्शाती है।
इस अवसर की मुख्य अतिथि शूलिनी विश्वविद्यालय की मुख्य शिक्षण अधिकारी डॉ. आशू खोसला थीं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी शैक्षणिक पढ़ाई के साथ-साथ सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया और संतुलित विकास के महत्व पर प्रकाश डाला।
शीतकालीन शिविर को माता-पिता और कर्मचारियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, जिन्होंने बच्चों के लिए एक सुरक्षित, आनंदमय और समृद्ध वातावरण प्रदान करने के विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की।





